₹1 करोड़ की कार। सुनने में ही सपना लगता है। बड़ी SUV या लक्ज़री सेडान, दमदार इंजन, प्रीमियम इंटीरियर और रोड पर अलग पहचान। लेकिन असली सवाल कार खरीदने का नहीं है — उसे रखने का है।
कई लोग सिर्फ एक्स-शोरूम कीमत देखकर फैसला कर लेते हैं। लेकिन ₹1 करोड़ की कार का असली खर्च गाड़ी की चाबी मिलने के बाद शुरू होता है। आइए पूरा हिसाब आसान भाषा में समझते हैं।
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1. ऑन-रोड कीमत: ₹1 करोड़ सिर्फ शुरुआत है
अगर कार की एक्स-शोरूम कीमत ₹1 करोड़ है, तो ऑन-रोड कीमत इससे काफी ज्यादा होती है।
इसमें जुड़ते हैं:
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RTO और रोड टैक्स
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इंश्योरेंस
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रजिस्ट्रेशन
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हैंडलिंग चार्ज
अक्सर ₹1 करोड़ की कार की ऑन-रोड कीमत ₹1.15 करोड़ से ₹1.25 करोड़ तक पहुंच जाती है। यानी शुरुआत में ही 15–25 लाख अतिरिक्त।

2. EMI का असली गणित
मान लीजिए आपने ₹30 लाख डाउन पेमेंट दिया और बाकी ₹90 लाख का लोन लिया। अगर 5 साल के लिए 9% ब्याज दर पर लोन लिया जाए, तो EMI लगभग ₹1.8 से ₹2 लाख प्रति महीने तक जा सकती है। 5 साल में आप सिर्फ ब्याज में 15–20 लाख रुपये तक दे सकते हैं। यानी कार की असली कीमत EMI के साथ और बढ़ जाती है।
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3. इंश्योरेंस: हर साल बड़ा खर्च
लक्ज़री कार का इंश्योरेंस सस्ता नहीं होता। पहले साल का इंश्योरेंस 2.5 से 4 लाख रुपये तक हो सकता है। हर साल रिन्यूअल पर 1.5 से 2.5 लाख रुपये देना पड़ सकता है। अगर क्लेम हिस्ट्री खराब रही, तो प्रीमियम और बढ़ सकता है।
4. सर्विस और मेंटेनेंस: असली झटका
लक्ज़री कार का मेंटेनेंस आम कार जैसा नहीं होता।
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एक साल की सामान्य सर्विस: ₹50,000 से ₹1.5 लाख
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ब्रेक पैड बदलना: ₹70,000 से ₹1 लाख
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टायर बदलना (4 टायर): ₹1.5 से ₹3 लाख
अगर कोई बड़ा पार्ट खराब हो जाए, तो बिल लाखों में जा सकता है। कुछ कंपनियां सर्विस पैकेज देती हैं, लेकिन वो भी पहले से पैसे लेकर ही मिलते हैं।
5. माइलेज और फ्यूल खर्च
₹1 करोड़ की कार आमतौर पर 8–12 किलोमीटर प्रति लीटर माइलेज देती है। अगर आप महीने में 1,000 किलोमीटर चलाते हैं और पेट्रोल ₹110 प्रति लीटर है, तो: मासिक फ्यूल खर्च लगभग ₹10,000–₹15,000 हो सकता है। साल भर में यह ₹1.5 लाख से ऊपर जा सकता है।
6. डिप्रिसिएशन: असली छुपा हुआ नुकसान
सबसे बड़ा खर्च जो लोग भूल जाते हैं — डिप्रिसिएशन। लक्ज़री कार पहले 3 साल में अपनी कीमत का 30–40% तक खो सकती है। अगर आपने ₹1.2 करोड़ ऑन-रोड देकर कार खरीदी, तो 3–4 साल बाद उसकी रिसेल वैल्यू ₹70–80 लाख के आसपास हो सकती है। यानी कागज पर ही 40–50 लाख का नुकसान।
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7. छोटे लेकिन लगातार खर्च
इसके अलावा भी कई छोटे खर्च होते हैं:
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डिटेलिंग और पॉलिश
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एक्सेसरीज
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हाई-एंड पार्किंग स्पेस
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ड्राइवर की सैलरी (अगर रखते हैं)
अगर ड्राइवर रखते हैं, तो ₹15,000–₹25,000 प्रति महीने अलग से।

8. असली ओनर का अनुभव
जो लोग ₹1 करोड़ की कार रखते हैं, वे बताते हैं कि: कार खरीदना आसान है, उसे बनाए रखना असली जिम्मेदारी है। यह सिर्फ स्टेटस सिंबल नहीं, बल्कि फाइनेंशियल कमिटमेंट है। अगर आपकी सालाना आय स्थिर और मजबूत नहीं है, तो ऐसी कार आर्थिक दबाव बना सकती है।
तो क्या ₹1 करोड़ की कार लेना गलत है?
बिलकुल नहीं। अगर आपकी आय, सेविंग और निवेश मजबूत हैं और EMI आपकी आय का छोटा हिस्सा है, तो यह खुशी का फैसला हो सकता है। लेकिन अगर आप सिर्फ दिखावे या इमोशनल फैसले से खरीद रहे हैं, तो बाद में पछतावा हो सकता है।
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निष्कर्ष: सपना या जिम्मेदारी?
₹1 करोड़ की कार सिर्फ एक गाड़ी नहीं, एक लाइफस्टाइल है। लेकिन यह लाइफस्टाइल EMI, इंश्योरेंस, सर्विस और डिप्रिसिएशन के साथ आता है। कार लेने से पहले पूरा हिसाब जरूर लगाएं। क्योंकि असली खर्च चाबी मिलने के बाद शुरू होता है। उम्मीद है आपको हमारी वेबसाइट THE GYAN TV का ये लेख ज़रूर पसंद आया होगा.
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