अंबानी अपने पैसों से पाल रहे हैं वंतारा में हज़ारों जीव-जंतु, रोज़ आता है इतना खर्च

जब देश के सबसे अमीर परिवार की बात होती है, तो ज़हन में आलीशान घर, महंगी गाड़ियां और बिज़नेस साम्राज्य की तस्वीर उभरती है। लेकिन अंबानी परिवार का एक ऐसा पहलू भी है, जिसकी चर्चा कम होती है और जो सीधे प्रकृति और जीव-जंतुओं से जुड़ा हुआ है। हम बात कर रहे हैं गुजरात के जामनगर में बने वंतारा प्रोजेक्ट की, जहां हज़ारों जानवरों की देखभाल पूरी तरह निजी खर्च पर की जा रही है।

इस प्रोजेक्ट को लेकर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आख़िर वंतारा में जानवरों पर रोज़ाना कितना खर्च आता होगा। आइए इस पूरे मामले को आसान भाषा में समझते हैं।

वंतारा क्या है और क्यों बनाया गया

वंतारा एक विशाल पशु संरक्षण और पुनर्वास केंद्र है, जिसे रिलायंस समूह से जुड़े लोगों की पहल माना जाता है। इस प्रोजेक्ट का मकसद घायल, बीमार और लुप्तप्राय जीव-जंतुओं को सुरक्षित माहौल देना और उनका इलाज करना है।

कहा जाता है कि यह सिर्फ चिड़ियाघर नहीं, बल्कि जानवरों के लिए एक मेडिकल और केयर सेंटर की तरह काम करता है. इस पहल को अंबानी परिवार की प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील सोच से जोड़कर देखा जाता है।

वंतारा में कितने तरह के जीव-जंतु हैं

रिपोर्ट्स के मुताबिक वंतारा में देश-विदेश से लाए गए कई तरह के जीव-जंतु रखे गए हैं। इनमें बड़े जानवरों से लेकर दुर्लभ प्रजातियां तक शामिल हैं।
यहां जानवरों को सिर्फ रखा नहीं जाता, बल्कि उनके रहन-सहन, खान-पान और इलाज का पूरा ध्यान रखा जाता है।

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हर प्रजाति के लिए अलग माहौल और अलग टीम होती है, जिससे खर्च अपने आप बढ़ जाता है।

रोज़ाना खाने-पीने पर कितना खर्च आता है

जानवरों का सबसे बड़ा खर्च उनके खाने पर आता है। बड़े जानवरों को रोज़ाना भारी मात्रा में भोजन चाहिए होता है। जानकारों के अनुसार, वंतारा में सिर्फ खाने और पोषण पर ही कई करोड़ रुपये महीने का खर्च आ सकता है।

अगर रोज़ाना के हिसाब से देखा जाए, तो यह खर्च कई लाख रुपये प्रतिदिन तक पहुंच सकता है। इसमें फल, सब्ज़ियां, मांस, विशेष आहार और सप्लीमेंट शामिल होते हैं।

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इलाज और मेडिकल देखभाल का खर्च

वंतारा में जानवरों के लिए आधुनिक मेडिकल सुविधाएं मौजूद बताई जाती हैं। यहां पशु चिकित्सक, नर्स और केयरटेकर की पूरी टीम रहती है।
घायल या बीमार जानवरों का इलाज किसी अस्पताल से कम खर्चीला नहीं होता। माना जाता है कि मेडिकल सुविधाओं और दवाओं पर भी रोज़ाना लाखों रुपये का खर्च आता है, खासकर तब जब किसी जानवर का विशेष इलाज चल रहा हो।

स्टाफ और देखभाल पर होने वाला खर्च

हज़ारों जानवरों की देखभाल के लिए सैकड़ों कर्मचारियों की जरूरत होती है। इनमें डॉक्टर, ट्रेनर, सफाई कर्मचारी और सुरक्षा कर्मी शामिल होते हैं।
इन सभी की सैलरी, रहने-खाने और सुविधाओं का खर्च भी वंतारा प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा है।

अनुमानों के मुताबिक, स्टाफ पर होने वाला खर्च भी रोज़ाना काफी बड़ी रकम तक पहुंचता है।

तो कुल मिलाकर रोज़ का खर्च कितना हो सकता है

हालांकि वंतारा के खर्च को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, वंतारा में जानवरों की देखभाल पर रोज़ाना कई करोड़ रुपये तक का खर्च हो सकता है। यह खर्च पूरी तरह निजी बताया जाता है और इसे अंबानी परिवार खुद वहन करता है।

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अंबानी परिवार की सोच क्या दिखाती है

यह पहल सिर्फ पैसे की ताकत नहीं, बल्कि सोच की गहराई भी दिखाती है। जहां आमतौर पर लोग अपने शौक पर पैसा खर्च करते हैं, वहीं वंतारा जैसे प्रोजेक्ट के ज़रिये अंबानी परिवार जीव-जंतुओं के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाता दिखता है।

इससे यह संदेश भी जाता है कि अगर संसाधन हों, तो उनका इस्तेमाल प्रकृति के लिए भी किया जा सकता है।

निष्कर्ष

वंतारा सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि जीव-जंतुओं के लिए एक सुरक्षित दुनिया मानी जा रही है। अंबानी परिवार द्वारा अपने निजी खर्च पर हज़ारों जानवरों की देखभाल करना अपने आप में अनोखी बात है। रोज़ाना का खर्च लाखों-करोड़ों में होने के बावजूद यह पहल लगातार चल रही है, जो इसे और भी खास बनाती है।

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