कुछ साल पहले तक अगर किसी की सालाना ₹25 लाख की सैलरी होती थी तो उसे “सेटल” माना जाता था। परिवार खुश, बैंक बैलेंस मजबूत और भविष्य सुरक्षित। लेकिन 2026 में कई लोग यही सैलरी होने के बावजूद कहते मिलते हैं कि पैसे बच ही नहीं रहे। सवाल यह नहीं है कि ₹25 लाख कम हैं या ज्यादा। असली सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या बदल गया है कि अच्छी-खासी कमाई भी कम पड़ने लगी है।
टैक्स के बाद असली इनकम की सच्चाई
सबसे पहले एक बात साफ कर लें — ₹25 लाख की सैलरी पूरी की पूरी आपके हाथ में नहीं आती। टैक्स, पीएफ, प्रोफेशनल टैक्स और अन्य कटौतियों के बाद सालाना लगभग ₹17–19 लाख ही बचते हैं। यानी महीने का लगभग ₹1.4 से ₹1.6 लाख। सुनने में यह अभी भी बड़ी रकम लगती है, लेकिन असली खेल खर्चों से शुरू होता है।
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अगर आप मेट्रो शहर में रहते हैं, तो घर का किराया या होम लोन EMI ही आपकी आय का बड़ा हिस्सा खा जाता है। अच्छे इलाके में 2BHK का किराया ₹40,000 से ₹60,000 तक पहुंच सकता है। अगर घर लिया है तो EMI ₹60,000–₹90,000 तक होना आम बात है। इसके ऊपर बिजली, मेंटेनेंस, गैस, इंटरनेट और रोजमर्रा का खर्च अलग। महीने का 80,000 से 1 लाख तो सिर्फ रहने और बुनियादी जरूरतों में निकल सकता है।
लाइफस्टाइल और बढ़ती महंगाई का दबाव
आज की सबसे बड़ी समस्या सिर्फ महंगाई नहीं है, बल्कि लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन है। पहले जहां लोग 5-6 साल एक ही फोन इस्तेमाल कर लेते थे, अब हर 2 साल में अपग्रेड सामान्य हो गया है। कार छोटी से बड़ी, फिर SUV। साल में एक-दो ट्रिप। बच्चों के लिए एक्टिविटी क्लास, कोचिंग, इंटरनेशनल स्कूल का दबाव।
इसके अलावा हेल्थ इंश्योरेंस, माता-पिता का इलाज, मेडिकल टेस्ट और आकस्मिक खर्च अलग। अगर परिवार है तो खर्च और तेजी से बढ़ते हैं। महीने के अंत में जब सब जोड़ते हैं तो पता चलता है कि बचत बहुत कम हो पाई है।
यही वजह है कि ₹25 लाख की सैलरी भी कई लोगों को तंग महसूस होती है। कमाई ठीक है, लेकिन खर्च उससे तेज भाग रहे हैं। और जब बचत सीमित रह जाती है, तो भविष्य को लेकर असुरक्षा बढ़ती है।
असली समस्या सैलरी नहीं, प्लानिंग है
ईमानदारी से देखें तो ₹25 लाख बुरी सैलरी नहीं है। लेकिन अगर खर्च बिना योजना के हैं, तो यह रकम भी कम लगेगी। असली फर्क तब आता है जब व्यक्ति बजट बनाता है, जरूरत और चाहत में अंतर समझता है और तुलना से बचता है।
सोशल मीडिया ने तुलना को बहुत आसान बना दिया है। अब हम सिर्फ पड़ोसी से नहीं, पूरी दुनिया से अपनी लाइफ की तुलना करते हैं। यह मानसिक दबाव खर्च को और बढ़ा देता है।

अगर हर महीने खर्च लिखकर ट्रैक किए जाएं, 6 महीने का इमरजेंसी फंड बनाया जाए और लाइफस्टाइल को आय के अनुसार रखा जाए, तो यही सैलरी आरामदायक जिंदगी दे सकती है।
निष्कर्ष
2026 में ₹25 लाख की सैलरी कम नहीं है, लेकिन बिना प्लानिंग के यह पर्याप्त महसूस नहीं होती। टैक्स, EMI, बच्चों की पढ़ाई, हेल्थ खर्च और लाइफस्टाइल मिलकर बजट को तंग कर देते हैं।
असली समाधान कमाई बढ़ाने से पहले खर्च समझने में है। जिस दिन खर्च नियंत्रण में आएंगे, उसी दिन यही सैलरी संतोषजनक लगने लगेगी। उम्मीद है आपको हमारी वेबसाइट THE GYAN TV का ये लेख ज़रूर पसंद आया होगा.
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