हम रोज़ आसमान में चाँद और सूरज को देखते हैं। कभी चाँद बड़ा और चमकीला लगता है, तो कभी छोटा। सूरज हर सुबह उगता है और शाम को ढल जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि धरती से चाँद और सूरज की असली दूरी कितनी है?
यह सवाल जितना सरल लगता है, उतना ही रोचक भी है। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
धरती से चाँद की दूरी कितनी है?
धरती से चाँद की औसत दूरी लगभग 3,84,400 किलोमीटर है। यह दूरी स्थिर नहीं रहती, क्योंकि चाँद धरती के चारों ओर एक अंडाकार (एलिप्टिकल) कक्षा में घूमता है।
इसका मतलब है कि कभी चाँद धरती के थोड़ा पास होता है और कभी थोड़ा दूर।
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जब चाँद धरती के सबसे पास होता है, तो दूरी लगभग 3,63,300 किलोमीटर होती है।
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जब चाँद सबसे दूर होता है, तो दूरी लगभग 4,05,500 किलोमीटर तक पहुंच जाती है।
इसी कारण कभी-कभी “सुपरमून” दिखाई देता है, जब चाँद सामान्य से थोड़ा बड़ा और चमकीला लगता है। अगर आप कार से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बिना रुके चाँद तक जाएं, तो वहां पहुंचने में लगभग 160 दिन लग जाएंगे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह दूरी कितनी विशाल है।

धरती से सूरज की दूरी कितनी है?
अब बात करते हैं सूरज की। धरती से सूरज की औसत दूरी लगभग 14 करोड़ 96 लाख किलोमीटर यानी करीब 15 करोड़ किलोमीटर है। इस दूरी को वैज्ञानिक भाषा में 1 खगोलीय इकाई (Astronomical Unit) भी कहा जाता है।
चाँद की तुलना में सूरज हमसे लगभग 400 गुना ज्यादा दूर है। लेकिन फिर भी हमें सूरज और चाँद आसमान में लगभग एक जैसे आकार के दिखाई देते हैं। इसका कारण यह है कि सूरज चाँद से लगभग 400 गुना बड़ा भी है। यही संतुलन सूर्य ग्रहण जैसी घटनाओं को संभव बनाता है।
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क्या सूरज की दूरी भी बदलती है?
हाँ, सूरज की दूरी भी पूरी तरह स्थिर नहीं है। धरती सूरज के चारों ओर अंडाकार कक्षा में घूमती है।
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जनवरी के आसपास धरती सूरज के सबसे पास होती है।
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जुलाई के आसपास धरती सूरज से थोड़ी दूर होती है।
लेकिन यह अंतर बहुत ज्यादा नहीं होता, और इससे मौसम पर बड़ा असर नहीं पड़ता। मौसम मुख्य रूप से धरती के झुकाव के कारण बदलते हैं, दूरी के कारण नहीं।
रोशनी को पहुंचने में कितना समय लगता है?
चाँद और सूरज की दूरी को समझने का एक और आसान तरीका है — रोशनी का समय।
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चाँद से धरती तक रोशनी को आने में लगभग 1.3 सेकंड लगते हैं।
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सूरज से धरती तक रोशनी को पहुंचने में लगभग 8 मिनट 20 सेकंड लगते हैं।
इसका मतलब है कि जब हम सूरज को देखते हैं, तो हम उसे 8 मिनट पहले की स्थिति में देख रहे होते हैं।
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दूरी का महत्व क्या है?
धरती, चाँद और सूरज के बीच की दूरी हमारे जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अगर चाँद बहुत पास होता, तो ज्वार-भाटा बहुत अधिक होता और समुद्री जीवन प्रभावित होता। अगर सूरज बहुत पास होता, तो धरती पर जीवन संभव नहीं होता क्योंकि अत्यधिक गर्मी सब कुछ जला देती। अगर सूरज बहुत दूर होता, तो धरती ठंडी और बर्फीली हो जाती। यह संतुलन ही धरती को जीवन के लिए अनुकूल बनाता है।

क्या भविष्य में यह दूरी बदलेगी?
वैज्ञानिकों के अनुसार चाँद हर साल लगभग 3 से 4 सेंटीमीटर दूर जा रहा है। यह बदलाव बहुत धीमा है और लाखों वर्षों में ही इसका बड़ा असर दिखाई देगा। सूरज और धरती की दूरी भी बहुत लंबे समय में बदल सकती है, लेकिन फिलहाल यह दूरी स्थिर और सुरक्षित मानी जाती है।
निष्कर्ष
धरती से चाँद की औसत दूरी लगभग 3.84 लाख किलोमीटर है, जबकि सूरज लगभग 15 करोड़ किलोमीटर दूर है। चाँद की रोशनी हमें लगभग 1 सेकंड में मिलती है, जबकि सूरज की रोशनी को धरती तक पहुंचने में 8 मिनट से ज्यादा समय लगता है।
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यह दूरी सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि जीवन के संतुलन की नींव हैं। अगर यह संतुलन थोड़ा भी अलग होता, तो शायद धरती पर जीवन संभव नहीं होता. आसमान में दिखने वाले ये दो खगोलीय पिंड हमें रोज दिखाई देते हैं, लेकिन उनकी दूरी और महत्व सच में अद्भुत हैं। उम्मीद है आपको हमारी वेबसाइट THE GYAN TV का ये लेख ज़रूर पसंद आया होगा.
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