कोहली और रोहित को नॉन-कमिटेबल कहने वालों के मुंह पर लगा ताला, दोनों बने अब टॉप-2 बल्लेबाज़

भारतीय क्रिकेट में जब भी फ़ॉर्म, उम्र या भविष्य को लेकर बहस होती है, तो सबसे पहले जिन दो नामों पर उंगली उठती है, वे हैं विराट कोहली और रोहित शर्मा। बीते कुछ समय से इन्हें “नॉन-कमिटेबल” कहने वालों की भी कमी नहीं थी। कहा जा रहा था कि अब इनका ध्यान क्रिकेट से हट चुका है, अब यह पहले जैसी भूख नहीं रखते।

लेकिन क्रिकेट ने एक बार फिर जवाब दे दिया है — और ऐसा जवाब, जिसमें किसी सफ़ाई की ज़रूरत ही नहीं पड़ी।

आज वनडे क्रिकेट में विराट कोहली और रोहित शर्मा दुनिया के टॉप-2 बल्लेबाज़ बन चुके हैं। आंकड़े बोल रहे हैं, रन बोल रहे हैं और रैंकिंग सब कुछ साफ़ कर रही है।

जब सवाल उठे, तब बल्ला बोला

पिछले कुछ महीनों में जब भी भारत का बड़ा मैच आया, तब इन दोनों पर सबसे ज़्यादा नज़रें थीं। आलोचकों को लग रहा था कि शायद अब इनसे निरंतर प्रदर्शन नहीं आएगा। लेकिन कोहली और रोहित ने वही किया, जो वे सालों से करते आए हैं — ज़रूरत पड़ते ही मोर्चा संभाल लिया।

कभी मुश्किल रन चेज़ में टिककर खेलना, कभी बड़े स्कोर की नींव रखना, तो कभी टीम को सम्मानजनक स्थिति तक पहुंचाना — दोनों ने अपने-अपने अंदाज़ में यह दिखा दिया कि कमिटमेंट शब्द उन्हें समझाने की ज़रूरत नहीं है।

वनडे क्रिकेट में अनुभव की असली क़ीमत

वनडे क्रिकेट सिर्फ ताक़त या स्ट्राइक रेट का खेल नहीं होता, यह हालात को पढ़ने और सही समय पर सही फ़ैसला लेने का खेल है। यही वह जगह है, जहां कोहली और रोहित बाकी बल्लेबाज़ों से अलग खड़े दिखते हैं।

रोहित शर्मा की सहज शुरुआत और बड़े शॉट खेलने की क्षमता, वहीं विराट कोहली की धैर्यभरी पारी और रन चेज़ करने की कला — इन दोनों का मेल ही भारत की वनडे ताक़त की रीढ़ बनता है।

नॉन-कमिटेबल कहने वालों की सोच क्यों ग़लत थी

अक्सर कमिटमेंट को घंटों अभ्यास या मैदान पर दिखने वाली आक्रामकता से जोड़ दिया जाता है। लेकिन असली कमिटमेंट यह होता है कि जब टीम को ज़रूरत हो, तब खिलाड़ी कैसा प्रदर्शन करता है।

कोहली और रोहित ने यह साबित किया कि:

  • वे ज़िम्मेदारी से पीछे नहीं हटते

  • दबाव में घबराते नहीं

  • और बड़े मौकों पर टीम को अकेला नहीं छोड़ते

यही वजह है कि आलोचना करने वालों की बातें अब खुद ही शांत हो गई हैं।

रैंकिंग नहीं, संदेश ज़्यादा बड़ा है

टॉप-2 वनडे बल्लेबाज़ बनना सिर्फ एक उपलब्धि नहीं है, बल्कि एक संदेश है — उम्र आंकड़ों से तय होती है, जुनून दिल से। जहां कई खिलाड़ी आते-जाते रहते हैं, वहीं कोहली और रोहित आज भी उसी स्तर पर खड़े हैं, जहां पहुंचने का सपना हर युवा बल्लेबाज़ देखता है।

टीम इंडिया को मिला भरोसे का सबसे मज़बूत आधार

भारतीय टीम के लिए यह स्थिति बेहद सुकून देने वाली है। जब शीर्ष क्रम में दो ऐसे बल्लेबाज़ हों, जिन पर किसी भी परिस्थिति में भरोसा किया जा सके, तो बाकी टीम अपने खेल पर ज़्यादा ध्यान दे पाती है। यही वजह है कि कोहली और रोहित सिर्फ रन बनाने वाले खिलाड़ी नहीं, बल्कि टीम की मानसिक मज़बूती भी हैं।

फैंस के लिए संतोष का पल

जो लोग सालों से इन दोनों को खेलते देख रहे हैं, उनके लिए यह पल खास है। यह उन तमाम सवालों का जवाब है, जो बिना ज़रूरत पूछे जा रहे थे। आज जब रैंकिंग में भारत के दो नाम सबसे ऊपर चमक रहे हैं, तो यह सिर्फ खिलाड़ियों की जीत नहीं, बल्कि भरोसे की जीत भी है।

निष्कर्ष

कोहली और रोहित को नॉन-कमिटेबल कहने वालों को आज किसी जवाब की ज़रूरत नहीं दी गई, क्योंकि जवाब खुद वनडे रैंकिंग ने दे दिया है।
दोनों का टॉप-2 बल्लेबाज़ बनना यह साफ़ दिखाता है कि क्लास, अनुभव और समर्पण कभी अचानक खत्म नहीं होता। जब तक बल्ला बोलता रहेगा, तब तक ऐसी बहसों पर ताला लगना तय है। उम्मीद है आपको हमारी वेबसाइट THE GYAN TV की यह जानकारी पसंद आई होगी और ऐसी ही विराट कोहली से जुड़ी एक और दिलचस्प खबर जानने के लिए यहाँ क्लिक करे संन्यास लेने के बाद भी बने कोहली फिर से दुनिया के नंबर-1 बल्लेबाज़, ऐसे हुआ ये कमाल

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Mohit Swami is the Head of Content at GYANTV, overseeing content strategy, editorial planning, and quality control across the platform. With experience in managing digital content workflows, he ensures that every article aligns with accuracy standards, audience relevance, and ethical publishing practices. His work focuses on building trustworthy, engaging, and reader-first content in health, lifestyle, and trending news categories.

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