पिछले कुछ सालों में इलेक्ट्रिक कारें तेजी से लोकप्रिय हुई हैं। पेट्रोल की बढ़ती कीमतें, पर्यावरण की चिंता और सरकारी सब्सिडी ने लोगों को EV की तरफ आकर्षित किया। कई लोगों ने सोचा कि अब फ्यूल खर्च से छुटकारा मिलेगा और भविष्य की टेक्नोलॉजी घर आ जाएगी।
लेकिन हर कहानी का दूसरा पहलू भी होता है। कुछ EV मालिक ऐसे भी हैं जो खरीदने के बाद कहते हैं — “सोचा कुछ और था, निकला कुछ और।” आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? चलिए असली वजह समझते हैं।
चार्जिंग की असली परेशानी
EV खरीदते समय ज्यादातर लोग मान लेते हैं कि चार्जिंग आसान होगी। लेकिन असल जिंदगी में यह हर किसी के लिए सरल नहीं है। अगर आपके पास अपना घर और पार्किंग स्पेस है, तो होम चार्जर लगाना संभव है। लेकिन अपार्टमेंट में रहने वालों के लिए यह हमेशा आसान नहीं होता। सोसायटी की अनुमति, अलग मीटर और इंस्टॉलेशन खर्च — यह सब झंझट बन सकता है।

पब्लिक चार्जिंग स्टेशन अभी हर जगह उपलब्ध नहीं हैं। कई बार चार्जर काम नहीं करता या पहले से कोई और कार लगी होती है। लंबी यात्रा के दौरान यह चिंता रहती है कि अगला चार्जिंग पॉइंट कितनी दूर है।
रेंज की चिंता
EV कंपनियां 400–500 किलोमीटर की रेंज का दावा करती हैं। लेकिन असली रेंज कई चीजों पर निर्भर करती है — ड्राइविंग स्टाइल, एसी का उपयोग, ट्रैफिक और सड़क की स्थिति।
कुछ मालिक बताते हैं कि सिटी में रेंज ठीक मिलती है, लेकिन हाईवे पर बैटरी जल्दी गिरती है। लंबी दूरी की यात्रा से पहले प्लानिंग करनी पड़ती है, जो पेट्रोल कार में जरूरी नहीं होती। इसी वजह से “रेंज एंग्जायटी” एक आम अनुभव बन गया है।
बैटरी डिग्रेडेशन और भविष्य की चिंता
EV की सबसे महंगी चीज उसकी बैटरी है। समय के साथ बैटरी की क्षमता धीरे-धीरे कम होती है। भले ही कंपनियां 8 साल की वारंटी देती हैं, लेकिन वारंटी खत्म होने के बाद बैटरी बदलने का खर्च लाखों में हो सकता है।
कुछ मालिकों को चिंता रहती है कि 5–6 साल बाद उनकी कार की रेंज काफी कम हो जाएगी और रिसेल वैल्यू भी गिर जाएगी।
रिसेल वैल्यू की हकीकत
पेट्रोल और डीजल कारों की सेकेंड-हैंड मार्केट काफी मजबूत है। लेकिन EV की रिसेल वैल्यू अभी स्थिर नहीं है। नई टेक्नोलॉजी तेजी से आ रही है। हर साल बेहतर बैटरी और ज्यादा रेंज वाली कार लॉन्च हो रही है। ऐसे में पुरानी EV की कीमत जल्दी गिर सकती है।
यही कारण है कि कुछ लोग EV खरीदने के बाद भविष्य को लेकर असमंजस में रहते हैं।
सर्विस कम, लेकिन खर्च शून्य नहीं
अक्सर कहा जाता है कि EV में मेंटेनेंस कम होता है क्योंकि इंजन और गियरबॉक्स नहीं होते। यह बात सही है कि ऑयल चेंज जैसी चीजें नहीं होतीं।
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लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि खर्च बिल्कुल नहीं है। टायर, ब्रेक, सॉफ्टवेयर अपडेट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स का खर्च बना रहता है। अगर कोई बड़ा इलेक्ट्रॉनिक पार्ट खराब हो जाए तो बिल भारी हो सकता है।
फिर भी लोग EV क्यों खरीद रहे हैं?
इन चुनौतियों के बावजूद EV के फायदे भी हैं।
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फ्यूल खर्च में बड़ी बचत
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स्मूद और शांत ड्राइविंग
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कम प्रदूषण
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कम नियमित सर्विस
जो लोग रोजाना 30–40 किलोमीटर शहर में ड्राइव करते हैं और घर पर चार्जिंग सुविधा है, उनके लिए EV काफी सुविधाजनक साबित हो रही है।

असली समस्या उम्मीदों की है
कई मामलों में पछतावे की वजह कार नहीं, बल्कि उम्मीदें होती हैं। लोगों ने EV को पेट्रोल कार का सीधा विकल्प समझ लिया, जबकि अभी यह हर स्थिति के लिए परफेक्ट नहीं है।
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अगर आपकी जरूरतें शहर तक सीमित हैं और आप चार्जिंग प्लान कर सकते हैं, तो EV सही विकल्प है। लेकिन अगर आप अक्सर लंबी दूरी तय करते हैं और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर कमजोर है, तो परेशानी हो सकती है।
निष्कर्ष
EV भविष्य है, लेकिन हर किसी के लिए अभी पूरी तरह परफेक्ट नहीं है। जो लोग बिना पूरी जानकारी और अपनी जरूरत समझे EV खरीद लेते हैं, उन्हें बाद में असुविधा महसूस हो सकती है।
असली फैसला खरीदने से पहले अपनी ड्राइविंग आदत, चार्जिंग सुविधा और बजट को ध्यान में रखकर लेना चाहिए। पछतावा कार की वजह से नहीं, अधूरी तैयारी की वजह से होता है। उम्मीद है आपको हमारी वेबसाइट THE GYAN TV का ये लेख ज़रूर पसंद आया होगा.
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