अगर आप SUV लेने की सोच रहे हैं और दिमाग में दो ही नाम घूम रहे हैं – Mahindra Scorpio और Tata Safari, तो आप अकेले नहीं हैं। भारत में SUV खरीदने वाले ज्यादातर लोग इसी कन्फ्यूजन से गुजरते हैं। बाहर से देखने पर दोनों दमदार लगती हैं, लेकिन असल फर्क तब समझ आता है जब इन्हें ज़िंदगी के इस्तेमाल से जोड़कर देखा जाए।
यह तुलना किसी ब्रांड को बड़ा या छोटा साबित करने के लिए नहीं है, बल्कि यह समझने के लिए है कि आपके लिए कौन-सी SUV सही बैठेगी।
सबसे पहले सोचिए – SUV आप किस लिए ले रहे हैं
यहीं से पूरा खेल साफ हो जाता है। अगर आपकी सोच है: खराब सड़कें, गांव-कस्बे, ऊबड़-खाबड़ रास्ते, ताकत और दबदबा तो आपकी सोच अपने-आप स्कॉर्पियो की तरफ जाती है। लेकिन अगर आपकी जरूरत है: फैमिली के साथ आरामदायक सफर, शहर और हाईवे ड्राइव, लंबी दूरी की यात्रा, प्रीमियम फील तो सफारी ज्यादा समझदारी लगती है।

रोड पर कौन ज़्यादा भारी लगती है
महिंद्रा स्कॉर्पियो को देखकर एक ही शब्द दिमाग में आता है – दबदबा। ऊंचा कद, चौड़ा बॉडी स्ट्रक्चर और पुरानी पहचान। स्कॉर्पियो आज भी गांव से लेकर शहर तक “SUV वाली SUV” मानी जाती है। लोग रास्ता देते हैं, क्योंकि गाड़ी खुद रास्ता बना लेती है।
टाटा सफारी का अंदाज़ अलग है। वह डराने नहीं आती, बल्कि अपनी मौजूदगी महसूस कराती है। बड़ी बॉडी, सॉफ्ट लाइन्स और प्रीमियम लुक – यह SUV ज्यादा सलीकेदार और परिपक्व लगती है।
सीधे शब्दों में:
- स्कॉर्पियो – रफ, रॉ और देसी ताकत
- सफारी – सॉलिड, शांत और क्लासी
अंदर बैठने पर फर्क साफ दिखता है
यहीं पर सफारी धीरे-धीरे आगे निकलने लगती है। सफारी के अंदर बैठते ही लगता है कि यह गाड़ी परिवार को ध्यान में रखकर बनाई गई है। सीटें चौड़ी हैं, लेगरूम अच्छा है और लंबी ड्राइव में शरीर पर थकान कम पड़ती है। पीछे बैठने वालों को भी पूरा सम्मान मिलता है।
स्कॉर्पियो का केबिन मजबूत है, लेकिन थोड़ा सख्त महसूस होता है। यह उन लोगों को ज्यादा पसंद आता है जिन्हें गाड़ी “चलाने” का अहसास चाहिए, न कि सिर्फ बैठने का आराम। अगर घर में बुजुर्ग या बच्चे हैं, तो सफारी का पलड़ा भारी हो जाता है।
ड्राइविंग में असली फर्क यहीं निकलता है
स्कॉर्पियो चलाते वक्त आपको हर समय यह एहसास रहता है कि आप एक भारी, ताकतवर SUV चला रहे हैं। खराब सड़कें, कच्चे रास्ते, गड्ढे – यह सब स्कॉर्पियो के लिए कोई बड़ी बात नहीं है।
सफारी की ड्राइविंग ज्यादा संतुलित है। शहर में चलाना आसान लगता है, हाईवे पर गाड़ी स्थिर रहती है और स्टेयरिंग ज्यादा दोस्ताना महसूस होता है। लेकिन अगर बात बहुत ज्यादा ऑफ-रोड की हो, तो स्कॉर्पियो वहां आगे निकल जाती है।
यहां फर्क साफ है:
- स्कॉर्पियो – मुश्किल रास्तों की दोस्त
- सफारी – रोज़मर्रा की साथी

इंजन और पावर की बात बिना घुमाए
स्कॉर्पियो को पावर के लिए जाना जाता है। एक्सेलेरेशन और टॉर्क दोनों में उसका अंदाज़ आक्रामक है। गाड़ी लोड में हो या चढ़ाई पर, वह शिकायत नहीं करती। सफारी का इंजन थोड़ा शांत स्वभाव का है। यह तेजी से भागने के बजाय आराम से, भरोसे के साथ चलता है। पावर कम नहीं है, लेकिन वह दिखावे वाली नहीं लगती। अगर आपको गाड़ी की ताकत महसूस करनी है, तो स्कॉर्पियो। अगर आपको गाड़ी पर भरोसा चाहिए, तो सफारी।
माइलेज और रोज़ का खर्च भी समझ लो
SUV लेने के बाद सबसे ज़्यादा सवाल यहीं आते हैं। सफारी आमतौर पर ज्यादा संतुलित माइलेज देती है और शहर में इसका खर्च थोड़ा काबू में रहता है।
स्कॉर्पियो का माइलेज थोड़ा कम हो सकता है, खासकर अगर आप उसे भारी रास्तों पर चलाते हैं। मेंटेनेंस के मामले में दोनों सस्ती नहीं हैं, लेकिन सफारी का खर्च थोड़ा ज्यादा प्रेडिक्टेबल लगता है।
फीचर्स और सेफ्टी – यहां सफारी आगे निकलती है
आज की SUV सिर्फ ताकत से नहीं बिकती, बल्कि फीचर्स और सेफ्टी से भी बिकती है। इस मामले में सफारी ज्यादा अपडेटेड और फैमिली-फ्रेंडली महसूस होती है। स्कॉर्पियो फीचर्स में उतनी चमक नहीं दिखाती, लेकिन भरोसे में कमी भी नहीं करती।
तो आखिर कौन है सबसे आगे?
अब सीधी और ईमानदार बात: अगर आपकी ज़िंदगी में, खराब सड़कें, ताकत, रफ इस्तेमाल, “स्कॉर्पियो वाली पहचान” ज्यादा मायने रखती है, तो महिंद्रा स्कॉर्पियो आगे है। लेकिन अगर आपकी प्राथमिकता: परिवार, आराम, लंबी यात्राएं, प्रीमियम फील है, तो टाटा सफारी ज़्यादा आगे निकल जाती है।
निष्कर्ष
महिंद्रा स्कॉर्पियो और टाटा सफारी में कोई भी गाड़ी “खराब” नहीं है। फर्क बस इतना है कि एक दिल से खरीदी जाती है और दूसरी दिमाग से। स्कॉर्पियो ताकत का नाम है। सफारी समझदारी का। अब फैसला आपको करना है कि आपकी ज़िंदगी में इस समय ताकत ज्यादा जरूरी है या सुकून।उम्मीद है आपको हमारी वेबसाइट thegyantv.com की यह जानकारी पसंद आई होगी।
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