आज के समय में लोग सेहत को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो चुके हैं। वजन बढ़ना, थकान, खराब पाचन और लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्याएं आम होती जा रही हैं। ऐसे में डाइट और एक्सरसाइज के साथ-साथ इंटरमिटेंट फास्टिंग का नाम तेजी से चर्चा में आया है। खासतौर पर 16:8 इंटरमिटेंट फास्टिंग को लोग सबसे आसान और असरदार तरीका मान रहे हैं। यह कोई कठिन डाइट प्लान नहीं है, बल्कि खाने के समय को सही तरीके से तय करने की एक आदत है। आइए आसान और साफ भाषा में समझते हैं कि 16:8 इंटरमिटेंट फास्टिंग क्या है, यह कैसे काम करती है और शरीर को इससे क्या फायदे मिल सकते हैं।
16:8 इंटरमिटेंट फास्टिंग क्या होती है
16:8 इंटरमिटेंट फास्टिंग का मतलब है दिन के 16 घंटे उपवास (फास्ट) और 8 घंटे खाने की अनुमति। इस दौरान आप 8 घंटे के अंदर अपना सारा खाना खाते हैं और बाकी 16 घंटे शरीर को आराम और खुद को रिपेयर करने का मौका मिलता है। उदाहरण के लिए, अगर आप सुबह 11 बजे खाना शुरू करते हैं और शाम 7 बजे तक खाना खत्म कर देते हैं, तो इसके बाद अगला खाना अगले दिन सुबह 11 बजे ही करेंगे। बीच के समय में सिर्फ पानी या बिना कैलोरी वाले पेय लिए जाते हैं।

यह तरीका लोगों को क्यों पसंद आ रहा है
इस फास्टिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें खाने की चीज़ों पर ज्यादा रोक नहीं होती, बल्कि समय पर फोकस किया जाता है। यही वजह है कि लोग इसे लंबे समय तक आसानी से फॉलो कर पाते हैं। जिन लोगों को बार-बार डाइट बदलने में परेशानी होती है, उनके लिए 16:8 तरीका ज्यादा सरल माना जाता है।
वजन घटाने में कैसे मदद करती है
16:8 इंटरमिटेंट फास्टिंग से शरीर को लंबे समय तक इंसुलिन लेवल कम रखने का मौका मिलता है। इससे शरीर जमा फैट को एनर्जी के रूप में इस्तेमाल करने लगता है। इसके अलावा, खाने का समय सीमित होने की वजह से बेवजह स्नैकिंग कम होती है, जिससे कैलोरी अपने आप कंट्रोल में आ जाती है।
पाचन तंत्र को मिलता है आराम
दिनभर लगातार कुछ न कुछ खाते रहने से पाचन तंत्र को पूरा आराम नहीं मिल पाता। 16 घंटे के फास्ट में पाचन तंत्र को खुद को संतुलित करने का समय मिलता है। इससे गैस, भारीपन और पेट फूलने जैसी समस्याएं धीरे-धीरे कम हो सकती हैं।
दिमाग और फोकस पर असर
कई लोग इंटरमिटेंट फास्टिंग के दौरान यह महसूस करते हैं कि उनका फोकस बेहतर हो रहा है। लंबे फास्ट के दौरान दिमाग ज्यादा सतर्क और शांत महसूस कर सकता है। सुस्ती कम होना और काम में ध्यान लगना इस आदत का एक सकारात्मक असर माना जाता है।
शरीर की अंदरूनी सफाई में मदद
जब शरीर को लंबे समय तक खाना नहीं मिलता, तो वह खुद की मरम्मत और सफाई की प्रक्रिया पर ध्यान देता है। इसे शरीर का नेचुरल क्लीन-अप मोड भी कहा जाता है। इसका असर धीरे-धीरे ऊर्जा, हल्केपन और ताजगी के रूप में महसूस हो सकता है।
16:8 फास्टिंग में क्या खाएं
8 घंटे के खाने के समय में संतुलित भोजन लेना जरूरी है। इसमें फल, सब्ज़ियां, दालें, प्रोटीन और हल्का कार्बोहाइड्रेट शामिल होना चाहिए। जंक फूड और बहुत ज्यादा मीठा खाने से फास्टिंग का फायदा कम हो सकता है।
फास्टिंग के दौरान क्या पी सकते हैं
फास्टिंग के समय पानी सबसे बेहतर विकल्प है। इसके अलावा बिना शक्कर की चाय या ब्लैक कॉफी ली जा सकती है। इनसे फास्टिंग नहीं टूटती और शरीर हाइड्रेट भी रहता है। मीठे ड्रिंक या पैकेज्ड जूस से बचना चाहिए।

किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए
हालांकि 16:8 इंटरमिटेंट फास्टिंग आम लोगों के लिए सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन हर शरीर अलग होता है। जिन लोगों को शुगर, कमजोरी या कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, उन्हें इस आदत को धीरे-धीरे अपनाना चाहिए। शरीर की प्रतिक्रिया को समझना सबसे जरूरी है।
कैसे शुरू करें यह आदत
शुरुआत में रोज़ 16 घंटे फास्ट करना मुश्किल लग सकता है। ऐसे में पहले 12–14 घंटे से शुरुआत करें और फिर धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। कुछ ही दिनों में शरीर इस रूटीन का आदी हो जाता है।
निष्कर्ष
16:8 इंटरमिटेंट फास्टिंग कोई चमत्कार नहीं, बल्कि एक अनुशासित जीवनशैली की आदत है। सही तरीके से अपनाई जाए तो यह वजन संतुलन, बेहतर पाचन, ज्यादा ऊर्जा और साफ रूटीन बनाने में मदद कर सकती है। अगर आप बिना बहुत सख्त डाइट के अपनी सेहत सुधारना चाहते हैं, तो 16:8 इंटरमिटेंट फास्टिंग एक समझदारी भरा और आज के समय का प्रभावी तरीका बन सकता है।
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