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परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र सिंह 15 गो’ली लगने के बाद भी लड़-ते रहे, कार’गिल की सच्ची दास्तां

भारत एक अखंड देश है जिसकी वीरता के चर्चे काफी सदियों से चले आ रहे हैं। भारत की अखंडता को बनाए रखने में भारतीय सैनिकों का सबसे बड़ा हाथ है जो सीमा पर डटकर दुश्म’नों का मुकाबला करते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच तीन यु’द्ध हो चुके हैं जिनमें हर बार पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी है लेकिन इसके बाद भी पाकिस्तानी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। आज आपको भारत के एक ऐसे वीर यो’द्धा की कहानी सुनाते हैं जिन्होंने अपने दम पर कार’गिल यु’द्ध में काफी पाकिस्तानी सैनिकों को मा’र गि’राया और शरीर में 15 गो’लि’यां लगने के बाद भी हार नहीं मानी और दुश्म’नों से डटकर मुकाबला करते रहे।

योगेंद्र सिंह यादव ने का’रगिल यु’द्ध को लेकर बताया किस्सा

योगेंद्र सिंह यादव का जन्म उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के गांव औरंगाबाद में 10 मई 1980 को हुआ। परमवीर धारी योगेंद्र सिंह यादव के पिता का नाम करण सिंह यादव और माता का नाम संतरा देवी है। योगेंद्र सिंह के पिता भारतीय सेना में तैनात रहे हैं, उन्होंने 1965 और 1971 में हुए भारत पाकिस्तान के यु’द्ध में भी हिस्सा लिया। योगेंद्र सिंह मात्र 18 वर्ष की उम्र में भारतीय सेना में शामिल हो गए और अगले साल ही 19 वर्ष में ही उनकी शादी रीना यादव से कर दी गई। शादी के तुरंत बाद जब योगेंद्र सिंह वापस ड्यूटी पर लौटे तो वहां पहले से ही यु’द्ध का ऐलान हो चुका था।

शरीर में लगी 15 गो’लि’यां फिर भी नहीं मानी हार

योगेंद्र सिंह ने कार’गिल यु’द्ध के बारे में जिक्र करते हुए बताया कि जिस समय पाकिस्तान के साथ यु’द्ध हो रहा था तब 35 पाकिस्तानी सिपाहियों ने उन पर हम’ला बोल दिया और उन्हें चारों ओर से घेर लिया। उस समय उनके सभी 6 साथी शही’द हो चुके थे और वह यु’द्ध के मैदान में अकेले डटे रहे जब उन्होंने देखा कि इतने सारे पाकिस्तानी सिपाही उनके चारों तरफ फैल गए हैं तो उन्होंने शौर्य का प्रदर्शन दिखाया। इस समय योगेंद्र सिंह यादव के हाथ पैर और शरीर के कुछ अन्य हिस्सों पर लगभग 15 गो’लि’यां लग चुकी थी। योगेंद्र सिंह यादव ने कहा कि “वह रण’भूमि में अचेत होकर गिर पड़े थे लेकिन इसके बाद उन्होंने वापस से हिम्मत दिखाई और ग्रेने’ड निकालकर पाकिस्तानी सैनिकों पर फें’क दिया, जिससे एक पाकिस्तानी सैनिक के चिथ’ड़े उड़ गए। तब पास में ही दूसरे साथी की गिरी हुई राइ’फल उठाकर पाकिस्तानी सैनिकों पर गो’लि’यां चला दी और 5 सैनिकों को ढे’र कर दिया। इसके बाद जब बात हाथ से निकलती जा रही थी तो पास में एक बहते नाले में छलांग लगा दी जिससे वह करीब 400 मीटर दूर चले गए इसके बाद भारतीय सैनिकों ने बाहर निकाला।”

महज 19 वर्ष की उम्र में हासिल किया परमवीर चक्र

योगेंद्र सिंह यादव के बेहतरीन साहस और सूझबूझ से भरे यु’द्ध कौशल के कारण उन्हें मात्र 19 वर्ष की उम्र में परमवीर चक्र से नवाजा गया। वह परमवीर चक्र प्राप्त करने वाले सबसे कम उम्र के सैनिक थे। आज योगेंद्र सिंह यादव सूबेदार मेजर के पद पर कार्यरत हैं। कार’गिल यु’द्ध के दौरान ही उन्हें 4 जुलाई 1999 को भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान पुरस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। ऐसे बहादुर सिपाही होना हमारे पूरे देश के लिए गर्व की बात है।

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