आज 25 से 35 साल की उम्र के लोग एक अजीब समस्या से गुजर रहे हैं — बिना भारी काम किए भी थकान। सुबह उठते ही फ्रेश महसूस नहीं होता। दिनभर हल्की सुस्ती रहती है। रात को सोने के बाद भी शरीर पूरी तरह रिचार्ज नहीं लगता।
ज्यादातर लोग इसे “काम का स्ट्रेस” कहकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या यह सिर्फ मानसिक दबाव है, या शरीर सच में कोई संकेत दे रहा है? यह सवाल इसलिए जरूरी है क्योंकि पहले जो उम्र ऊर्जा से भरी मानी जाती थी, वही अब थकान से जुड़ती जा रही है।
स्क्रीन टाइम और बैठी हुई लाइफस्टाइल का असर
आज का जीवन पहले से बिल्कुल अलग है। ऑफिस का काम लैपटॉप पर, सोशल मीडिया मोबाइल पर, मनोरंजन टीवी या फोन पर। औसतन एक व्यक्ति 8–10 घंटे स्क्रीन के सामने बिताता है।
अगर आप रोज़ रात 11 बजे से पहले सोना शुरू कर दें तो 30 दिन में शरीर में आ जायेगे ये बदलाव
लगातार बैठे रहने से:
• ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है
• मेटाबॉलिज्म कमजोर होता है
• शरीर की मांसपेशियां निष्क्रिय हो जाती हैं
नतीजा — शरीर थका हुआ महसूस करता है, भले आपने भारी शारीरिक काम न किया हो।

नींद पूरी लेकिन क्वालिटी खराब
कई लोग कहते हैं, “मैं 7–8 घंटे सोता हूँ, फिर भी थका क्यों हूँ?” समस्या घंटों की नहीं, क्वालिटी की है। देर रात मोबाइल स्क्रॉलिंग, नीली रोशनी और अनियमित सोने का समय गहरी नींद के चक्र को बाधित करते हैं। शरीर को रिकवरी के लिए गहरी नींद चाहिए। अगर यह पूरी नहीं हो रही, तो सुबह उठते समय शरीर अधूरा महसूस करेगा।
छुपी हुई पोषण की कमी
25–35 की उम्र में बाहर का खाना, अनियमित डाइट और जल्दी-जल्दी खाया गया भोजन आम बात है। आयरन, विटामिन D, B12 जैसी पोषण की कमी भी लगातार थकान का कारण बन सकती है।
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यह कमी तुरंत नहीं दिखती, लेकिन धीरे-धीरे ऊर्जा स्तर गिरने लगता है। अक्सर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं और सिर्फ कॉफी या एनर्जी ड्रिंक का सहारा लेते हैं।
मानसिक दबाव का शरीर पर असर
काम का दबाव, करियर की चिंता, भविष्य की असुरक्षा — यह सब दिमाग में लगातार चलता रहता है। जब तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो शरीर में कोर्टिसोल नामक हार्मोन बढ़ता है। यह हार्मोन अगर लंबे समय तक ऊंचा रहे, तो थकान, चिड़चिड़ापन और नींद की समस्या बढ़ सकती है। यानी यह सिर्फ “मन का मामला” नहीं है — यह शरीर पर भी असर डालता है।
क्या यह बर्नआउट का संकेत है?
अगर आपको: रोज सुबह उठने में मुश्किल, काम में रुचि कम, लगातार थकान, छोटी बात पर चिड़चिड़ापन महसूस हो रहा है, तो यह बर्नआउट का शुरुआती संकेत हो सकता है। बर्नआउट सिर्फ ऑफिस की समस्या नहीं, बल्कि पूरी लाइफस्टाइल का परिणाम है।
इससे बाहर कैसे निकलें?
समाधान जटिल नहीं है, लेकिन नियमितता चाहता है। रोज 20–30 मिनट हल्की शारीरिक गतिविधि, सोने से 1 घंटा पहले स्क्रीन बंद, संतुलित भोजन, हफ्ते में एक दिन मानसिक ब्रेक. ये छोटे बदलाव 3–4 हफ्तों में फर्क दिखा सकते हैं।

असली सच
25–35 की उम्र में थकान “नॉर्मल” नहीं है। यह शरीर का संकेत हो सकता है कि कुछ बदलने की जरूरत है। कभी-कभी हम बड़ी बीमारी ढूंढते हैं, जबकि समस्या छोटी-छोटी आदतों में छिपी होती है।
ऊर्जा कोई सप्लीमेंट से नहीं आती — वह सही नींद, संतुलित भोजन और सक्रिय जीवन से आती है।
निष्कर्ष
अगर आप भी कम उम्र में लगातार थकान महसूस कर रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज मत कीजिए। यह शरीर की शिकायत है, कमजोरी नहीं। छोटे-छोटे बदलाव कीजिए। अपने शरीर को सुनिए। और याद रखिए — युवा होना सिर्फ उम्र नहीं, ऊर्जा भी है। उम्मीद है आपको हमारी वेबसाइट THE GYAN TV का ये लेख ज़रूर पसंद आया होगा.
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