फ़िल्मी दुनिया में जहाँ अक्सर करियर और बड़े प्रोजेक्ट सबसे ऊपर रखे जाते हैं, वहीं कुछ फैसले ऐसे होते हैं जो इंसान को एक कलाकार से पहले पिता बना देते हैं। सुनील शेट्टी से जुड़ी हालिया खबर कुछ ऐसी ही है। चर्चा है कि उन्होंने अपनी पसंदीदा और बहुप्रतीक्षित फ़िल्म बॉर्डर 2 से खुद को अलग कर लिया—और इसकी वजह कोई और नहीं, बल्कि उनका बेटा है।
यह फैसला सुनने में जितना बड़ा लगता है, उतना ही भावनात्मक भी है। क्योंकि बॉर्डर जैसी फ़िल्म सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भावनाओं और देशभक्ति से जुड़ा अनुभव मानी जाती है।
क्यों खास थी बॉर्डर-2 सुनील शेट्टी के लिए
बॉर्डर जैसी फ़िल्मों का सुनील शेट्टी के करियर से एक खास रिश्ता रहा है। देशभक्ति, फौजी जज़्बा और सशक्त किरदार—ये सब उनके व्यक्तित्व से मेल खाते हैं। ऐसे में बॉर्डर-2 का हिस्सा बनना उनके लिए केवल काम नहीं, बल्कि दिल से जुड़ा मौका था।

माना जा रहा है कि कहानी और किरदार दोनों ही उन्हें पसंद आए थे। लेकिन इसी दौरान उनके बेटे के करियर से जुड़ा एक अहम मोड़ सामने आया, जहाँ पिता की मौजूदगी और सहारे की सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी।
बेटे के लिए लिया गया कठिन फैसला
बताया जाता है कि बेटे को उस समय मार्गदर्शन, समय और मानसिक सहारे की आवश्यकता थी। ऐसे में सुनील शेट्टी ने बिना किसी दिखावे के, शांत तरीके से फ़िल्म से कदम पीछे खींच लिए।
उन्होंने यह मानकर फैसला किया कि फ़िल्में फिर मिल सकती हैं, लेकिन अगर इस समय बेटे का साथ नहीं दिया, तो शायद खुद से नज़रें नहीं मिला पाएंगे। एक पिता के तौर पर उन्होंने वही किया, जो उस पल सबसे सही लगा।
करियर से ऊपर परिवार की सोच
सुनील शेट्टी हमेशा से परिवार को अपनी ताक़त बताते आए हैं। उनके लिए काम महत्वपूर्ण है, लेकिन रिश्ते उससे कहीं ऊपर। बॉर्डर-2 जैसी बड़ी फ़िल्म छोड़ना आसान नहीं होता, खासकर तब जब वह मन से पसंद भी हो।
लेकिन यही वह मोड़ है, जहाँ एक कलाकार नहीं, बल्कि एक पिता बोलता है। और सुनील शेट्टी ने यही दिखाया कि असली संतुलन वही है, जिसमें घर और काम—दोनों की अहमियत समझी जाए।
लोगों ने क्यों की तारीफ़
जैसे ही यह बात सामने आई, लोगों की प्रतिक्रियाएँ आने लगीं। कई लोगों ने इसे “असल ज़िंदगी का हीरो” कहा। कुछ ने यह भी लिखा कि बच्चों के लिए ऐसे फैसले बहुत मायने रखते हैं और उम्र भर याद रहते हैं।
आज के समय में, जब व्यस्तता के कारण परिवार पीछे छूट जाता है, ऐसे उदाहरण उम्मीद जगाते हैं कि सही समय पर सही चुनाव अब भी संभव है।

कम ही दिखते हैं ऐसे उदाहरण
फ़िल्म इंडस्ट्री में अक्सर यह सुना जाता है कि काम के दबाव में परिवार को समय नहीं मिल पाता। ऐसे में सुनील शेट्टी का यह कदम अलग इसलिए भी है, क्योंकि उन्होंने अपनी पसंद को भी किनारे रख दिया।
यह दिखाता है कि सफलता का पैमाना सिर्फ बड़े प्रोजेक्ट नहीं होते, बल्कि वह सुकून भी होता है जो सही फैसले से मिलता है।
निष्कर्ष
सुनील शेट्टी का बॉर्डर-2 छोड़ने का फैसला एक साधारण खबर नहीं, बल्कि एक गहरी सीख है। यह बताता है कि असली जिम्मेदारी वही है, जो ज़रूरत के समय निभाई जाए। बेटे के लिए लिया गया यह कदम साबित करता है कि बाप होना सिर्फ एक रिश्ता नहीं, बल्कि हर मोड़ पर साथ खड़े रहने का वादा है।
उम्मीद है आपको हमारी वेबसाइट THE GYAN TV की यह जानकारी पसंद आई होगी।
Ankish is a content editor at GYANTV, responsible for refining articles to ensure clarity, accuracy, and reader engagement. With a strong focus on fact-based reporting and clean storytelling, he works closely with writers to improve structure, language, and overall content quality. His editorial approach prioritizes authenticity, readability, and responsible publishing, especially across health, lifestyle, and trending topics.
