जब भी शादी की बात होती है, ज़्यादातर लोगों के दिमाग में बस फेरे, सिंदूर और विदाई की तस्वीर आ जाती है। लेकिन असल में भारतीय शादी सिर्फ एक दिन का कार्यक्रम नहीं होती, बल्कि कई रस्मों और परंपराओं का मेल होती है। हर रस्म के पीछे कोई न कोई मतलब छुपा होता है, जो दो लोगों को एक नए रिश्ते में बाँधने का काम करता है।
बहुत से लोग शादी की रस्मों को सिर्फ दिखावे या पुरानी परंपरा मान लेते हैं। लेकिन अगर ध्यान से देखा जाए, तो इनमें से कई रस्में आज भी रिश्तों को मजबूत बनाने में मदद करती हैं। खासकर ये तीन रस्में ऐसी हैं, जिन्हें निभाना आज भी ज़रूरी माना जाता है।
पहली रस्म — कन्यादान का असली मतलब
कन्यादान को अक्सर गलत तरीके से समझ लिया जाता है। बहुत से लोग सोचते हैं कि इसमें लड़की को किसी को “दान” कर दिया जाता है, लेकिन असल में इसका मतलब ऐसा नहीं है। कन्यादान का भाव यह होता है कि माता-पिता अपनी बेटी को पूरे सम्मान और भरोसे के साथ उसके नए जीवन की जिम्मेदारी सौंपते हैं।

इस रस्म में पिता या अभिभावक बेटी का हाथ दूल्हे के हाथ में देकर आशीर्वाद देते हैं। इसका मतलब यह होता है कि अब से दोनों एक-दूसरे का साथ निभाएंगे। भावनात्मक रूप से यह पल माता-पिता और बेटी दोनों के लिए बहुत खास होता है। इसी रस्म से शादी को समाज की मंजूरी भी मिलती है।
दूसरी रस्म — सात फेरे क्यों होते हैं?
सात फेरे भारतीय शादी की सबसे अहम रस्म मानी जाती है। हर फेरे के साथ दूल्हा-दुल्हन एक वादा करते हैं, जिसे जीवन भर निभाने की कोशिश करनी होती है। इन वादों में साथ निभाने, सम्मान करने, एक-दूसरे का ख्याल रखने और मुश्किल वक्त में साथ खड़े रहने जैसी बातें शामिल होती हैं।
अक्सर लोग फेरे को सिर्फ घूमने की रस्म समझ लेते हैं। लेकिन अगर सीधी भाषा में कहें तो ये फेरे शादी को सिर्फ सामाजिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और नैतिक रिश्ता भी बनाते हैं। यही वजह है कि बिना सात फेरों के शादी अधूरी मानी जाती है।
तीसरी रस्म — सिंदूर और मंगलसूत्र का महत्व
शादी के बाद जब दूल्हा दुल्हन की मांग में सिंदूर भरता है और मंगलसूत्र पहनाता है, तो यह सिर्फ एक रस्म नहीं होती। इसका मतलब यह होता है कि अब दोनों पति-पत्नी के रूप में एक-दूसरे से जुड़े हैं।
सिंदूर और मंगलसूत्र को विवाह का प्रतीक माना जाता है। बहुत सी महिलाएँ इन्हें अपने वैवाहिक जीवन की पहचान के रूप में देखती हैं। भावनात्मक तौर पर यह रस्म दुल्हन के लिए बहुत खास होती है, क्योंकि इसी पल उसे अपने नए रिश्ते की आधिकारिक शुरुआत महसूस होती है।

इन रस्मों के पीछे छुपी असली सोच
अगर ध्यान से देखा जाए, तो इन तीनों रस्मों का मकसद सिर्फ परंपरा निभाना नहीं है। इनका असली उद्देश्य दो लोगों के रिश्ते को समाज, परिवार और खुद उनके मन में पक्का करना होता है।
कन्यादान माता-पिता के भरोसे को दिखाता है, सात फेरे आपसी वादों को मजबूत करते हैं, और सिंदूर-मंगलसूत्र रिश्ते की पहचान बनते हैं। ये रस्में इंसान को यह एहसास दिलाती हैं कि शादी सिर्फ एक समझौता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और साथ निभाने का नाम है।
आज के दौर में इन रस्मों की जरूरत क्यों है?
आजकल कई लोग कोर्ट मैरिज या सादगी से शादी करना पसंद करते हैं, जो बिल्कुल ठीक है। लेकिन फिर भी बहुत से लोग पारंपरिक रस्मों को निभाना चाहते हैं, क्योंकि इससे परिवार और समाज का जुड़ाव बना रहता है।
अक्सर देखा गया है कि जब रस्में निभाई जाती हैं, तो रिश्ते की शुरुआत ज्यादा भावनात्मक और मजबूत महसूस होती है। इससे दूल्हा-दुल्हन को भी यह एहसास होता है कि वे सिर्फ कागज़ पर नहीं, बल्कि दिल से भी एक-दूसरे से जुड़े हैं।
क्या इन रस्मों के बिना शादी अधूरी है?
इस सवाल का जवाब हर किसी के लिए अलग हो सकता है। कानूनी तौर पर तो शादी रजिस्ट्रेशन से भी मान्य हो जाती है। लेकिन पारंपरिक नजरिए से देखा जाए, तो ये रस्में शादी को एक सामाजिक और भावनात्मक पहचान देती हैं।
बहुत से बुजुर्ग मानते हैं कि इन रस्मों से रिश्ते में आशीर्वाद और स्थिरता आती है। वहीं नई पीढ़ी इसे एक खूबसूरत परंपरा के रूप में देखती है, जिसे निभाने में उन्हें गर्व महसूस होता है।
नई पीढ़ी इन रस्मों को कैसे देखती है?
आज की पीढ़ी हर चीज़ को अपनी सुविधा और सोच के हिसाब से ढाल रही है। कई कपल रस्मों को छोटा या सिंपल तरीके से निभाते हैं, लेकिन पूरी तरह छोड़ते नहीं हैं।
इसका मतलब यह नहीं कि वे परंपरा को कम महत्व देते हैं। बल्कि वे इसे अपने तरीके से अपनाना चाहते हैं। इससे साफ होता है कि ये रस्में आज भी लोगों के दिलों में जगह बनाए हुए हैं।
निष्कर्ष
शादी में कई रस्में होती हैं, लेकिन कन्यादान, सात फेरे और सिंदूर-मंगलसूत्र जैसी रस्में आज भी बेहद अहम मानी जाती हैं। ये सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि रिश्ते की नींव रखने वाली रस्में हैं।
अगर आप शादी की तैयारी कर रहे हैं या शादी को समझना चाहते हैं, तो इन रस्मों का मतलब जानना आपको अपने रिश्ते को और गहराई से समझने में मदद कर सकता है।
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