मोदी जी रहते है दिल्ली में इस आलीशान घर में, रोज़ होता है इतना सरकारी खर्च

देश के प्रधानमंत्री की जीवनशैली को लेकर आम लोगों में हमेशा जिज्ञासा रहती है। खासतौर पर यह सवाल अक्सर पूछा जाता है कि प्रधानमंत्री कहां रहते हैं, उनका सरकारी आवास कितना बड़ा है और उसकी देखरेख पर सरकार को रोज़ाना कितना खर्च उठाना पड़ता है। जब बात नरेंद्र मोदी की आती है, तो यह सवाल और भी ज्यादा चर्चा में आ जाता है।

प्रधानमंत्री मोदी दिल्ली में जिस सरकारी आवास में रहते हैं, वह सिर्फ एक घर नहीं बल्कि देश के सबसे सुरक्षित और सुव्यवस्थित परिसरों में से एक माना जाता है। इसकी व्यवस्था, सुरक्षा और संचालन में हर दिन बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी और संसाधन लगे रहते हैं।

कहां स्थित है प्रधानमंत्री का सरकारी आवास

प्रधानमंत्री का आधिकारिक निवास 7, लोक कल्याण मार्ग, नई दिल्ली में स्थित है। पहले इसे 7 रेस कोर्स रोड के नाम से जाना जाता था। यह इलाका दिल्ली के सबसे सुरक्षित और वीआईपी क्षेत्रों में गिना जाता है।

यह पूरा परिसर कई एकड़ में फैला हुआ है, जिसमें:

  • मुख्य आवास

  • मीटिंग और ऑफिस स्पेस

  • गार्ड रूम और सुरक्षा भवन

  • गार्डन और खुले परिसर

शामिल हैं। यह आवास प्रधानमंत्री के रहने के साथ-साथ उनके आधिकारिक कामकाज के लिए भी इस्तेमाल होता है।

सिर्फ घर नहीं, एक पूरा प्रशासनिक सिस्टम

प्रधानमंत्री का आवास किसी आम व्यक्ति के घर जैसा नहीं होता। यहां हर चीज़ एक तय प्रोटोकॉल के तहत चलती है। सुरक्षा, सफाई, बिजली, पानी, मेंटेनेंस और तकनीकी व्यवस्था — हर विभाग के लिए अलग-अलग टीम काम करती है।

इस परिसर में:

  • सुरक्षा बल 24 घंटे तैनात रहते हैं

  • टेक्निकल स्टाफ हर समय अलर्ट रहता है

  • हाउसकीपिंग और मेंटेनेंस कर्मचारी शिफ्टों में काम करते हैं

यही वजह है कि इस आवास को चलाने का खर्च आम घरों से तुलना के दायरे से बाहर होता है।

रोज़ का सरकारी खर्च कितना होता है

सरकारी रिकॉर्ड और अलग-अलग रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री आवास की सुरक्षा और रखरखाव पर रोज़ाना लाखों रुपये तक का खर्च आता है। इसमें शामिल होते हैं:

  • सुरक्षा व्यवस्था पर होने वाला खर्च

  • बिजली, पानी और अन्य सुविधाएं

  • कर्मचारियों का वेतन और लॉजिस्टिक खर्च

  • मेंटेनेंस और तकनीकी सिस्टम

हालांकि, सुरक्षा कारणों से सटीक रोज़ाना खर्च का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया जाता, लेकिन यह साफ है कि यह खर्च देश की सबसे उच्च प्राथमिकताओं में आता है। सरकार इसे प्रधानमंत्री की सुरक्षा और सुचारु कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक मानती है।

सुरक्षा पर सबसे ज़्यादा ज़ोर

प्रधानमंत्री की सुरक्षा देश की सबसे संवेदनशील व्यवस्था मानी जाती है। उनके आवास पर विशेष सुरक्षा बल तैनात रहते हैं, जो कई स्तरों में काम करते हैं। इसमें केवल घर के भीतर ही नहीं, बल्कि आसपास के पूरे इलाके की निगरानी शामिल होती है।

सीसीटीवी, आधुनिक सर्विलांस सिस्टम, कंट्रोल रूम और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें हर समय सक्रिय रहती हैं। यही कारण है कि कुल खर्च का बड़ा हिस्सा सुरक्षा से जुड़ा होता है।

आलीशान दिखने के पीछे की सादगी

हालांकि प्रधानमंत्री का आवास आकार और सुविधाओं के लिहाज से आलीशान माना जाता है, लेकिन अंदरूनी तौर पर इसे सादा और व्यावहारिक बताया जाता है। कई बार सामने आई तस्वीरों और रिपोर्ट्स में यह देखा गया है कि प्रधानमंत्री का निजी रहन-सहन बेहद सीमित और अनुशासित रहता है।

आवास को ज्यादा भव्य दिखाने के बजाय, इसे कामकाज और सुरक्षा के अनुकूल रखा गया है। सरकारी संपत्ति होने के कारण हर खर्च का हिसाब तय नियमों के तहत किया जाता है।

क्या यह खर्च जायज़ है?

अक्सर यह सवाल भी उठता है कि प्रधानमंत्री आवास पर होने वाला इतना खर्च कितना जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि देश के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति की सुरक्षा और कामकाज से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।

प्रधानमंत्री का हर फैसला करोड़ों लोगों की ज़िंदगी को प्रभावित करता है। ऐसे में उनकी सुरक्षा, सुविधा और कार्यक्षमता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी होती है।

आम नागरिक की ज़िंदगी से तुलना

जहां आम नागरिक अपने घर के बिजली-पानी और सुरक्षा खर्च को खुद संभालता है, वहीं प्रधानमंत्री का आवास पूरे देश के प्रशासनिक ढांचे का हिस्सा होता है। यह फर्क सिर्फ सुविधा का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और जोखिम का भी होता है।

इसी वजह से प्रधानमंत्री के आवास पर होने वाला खर्च सामान्य तुलना से अलग नजरिए से देखा जाता है।

निष्कर्ष

दिल्ली में स्थित प्रधानमंत्री का सरकारी आवास भले ही बाहर से आलीशान दिखता हो, लेकिन इसके पीछे एक बेहद सख्त सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचा काम करता है। रोज़ होने वाला सरकारी खर्च इस बात का संकेत है कि देश के सर्वोच्च पद की जिम्मेदारियां कितनी व्यापक होती हैं।

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