मकरसक्रांति के दिन खिलाना चाहिए गाय को चारा, धूल जायेगे सारे पाप

मकर संक्रांति भारत के उन त्योहारों में से एक है, जिनका संबंध केवल पूजा-पाठ से नहीं बल्कि जीवन, प्रकृति और पुण्य से भी जुड़ा हुआ है। इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है और माना जाता है कि देवताओं का दिन शुरू होता है। यही कारण है कि मकर संक्रांति को दान, सेवा और पुण्य कमाने का विशेष अवसर माना गया है। इसी दिन गाय को चार चीज़ें खिलाने की परंपरा भी बहुत प्राचीन मानी जाती है।

अक्सर बुज़ुर्ग कहते हैं कि मकर संक्रांति के दिन अगर सच्चे मन से गाय को ये चार चीज़ें खिला दी जाएं, तो जीवन के बड़े से बड़े पाप भी धुल जाते हैं। यह बात सुनने में भले आस्था से जुड़ी लगे, लेकिन इसके पीछे धार्मिक, सामाजिक और व्यवहारिक सोच भी छिपी हुई है।

गाय का महत्व क्यों माना गया है सबसे ऊपर

भारतीय परंपरा में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। कहा जाता है कि गाय में सभी देवताओं का वास होता है। गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि पालन, पोषण और सेवा का प्रतीक मानी जाती है। यही कारण है कि गाय की सेवा को सबसे बड़ा पुण्य माना गया है।

मकर संक्रांति के दिन जब दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है, तब गाय को भोजन कराना आत्मशुद्धि और सेवा भाव का सबसे सरल तरीका माना गया है।

पहली चीज़ – गुड़

मकर संक्रांति पर गुड़ का विशेष महत्व होता है। ठंड के मौसम में गुड़ शरीर को गर्मी देता है और शक्ति बढ़ाता है। गाय को गुड़ खिलाने का अर्थ है मिठास और सकारात्मकता का दान।

मान्यता है कि गुड़ खिलाने से जीवन में कड़वाहट दूर होती है और पुराने दोष शांत होते हैं। यह दान मन और कर्म दोनों को शुद्ध करता है।

दूसरी चीज़ – तिल

तिल को पाप नाशक माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि तिल का दान करने से पिछले जन्मों के दोष भी कम होते हैं। मकर संक्रांति के दिन तिल खाने और खिलाने की परंपरा इसी कारण से जुड़ी हुई है।

गाय को तिल खिलाने से व्यक्ति के जीवन में जमा नकारात्मक कर्म शांत होते हैं और आने वाले समय में सुख-शांति का मार्ग खुलता है।

तीसरी चीज़ – हरी घास या चारा

गाय के लिए हरी घास सबसे प्रिय भोजन होता है। मकर संक्रांति के दिन गाय को हरी घास या चारा खिलाना सेवा और करुणा का प्रतीक माना जाता है।

यह दान यह सिखाता है कि सिर्फ पूजा ही नहीं, बल्कि जीवों के प्रति दया भी धर्म का हिस्सा है। जो व्यक्ति इस दिन गाय को पेट भरकर चारा खिलाता है, उसके जीवन में अन्न और धन की कभी कमी नहीं रहती, ऐसा माना जाता है।

चौथी चीज़ – रोटी या खिचड़ी

ग्रामीण क्षेत्रों में मकर संक्रांति के दिन गाय को रोटी या खिचड़ी खिलाने की परंपरा बहुत पुरानी है। यह भोजन घर के अन्न से बनाया जाता है, इसलिए इसे सच्चे मन से किया गया दान माना जाता है।

मान्यता है कि इससे परिवार में अन्न का भंडार भरा रहता है और आर्थिक परेशानियां धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।

चार चीज़ें ही क्यों मानी गईं खास

इन चार चीज़ों में जीवन के चार मूल तत्व छिपे माने जाते हैं — मिठास, शुद्धता, करुणा और संतुलन।जब कोई व्यक्ति मकर संक्रांति के दिन गाय को ये चार चीज़ें खिलाता है, तो वह अनजाने में ही अपने कर्म, विचार और व्यवहार को संतुलित करता है।

यही कारण है कि कहा जाता है कि इस दिन गाय को भोजन कराने से “पाप धुल जाते हैं”। इसका अर्थ यह नहीं कि गलत कर्म करके सब माफ हो जाएगा, बल्कि यह कि व्यक्ति सेवा और दान के रास्ते पर आगे बढ़ता है।

मकर संक्रांति और सेवा का गहरा संबंध

मकर संक्रांति सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा में मोड़ने का दिन माना जाता है। इस दिन दान करने से मन हल्का होता है और अहंकार कम होता है।

गाय को भोजन कराना इसलिए भी खास है क्योंकि यह सेवा बिना किसी दिखावे के की जाती है। न कोई नाम, न कोई पहचान — सिर्फ सेवा भाव।

आज के समय में इसका क्या अर्थ है

आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में लोग अक्सर धर्म को सिर्फ पूजा तक सीमित कर लेते हैं। लेकिन मकर संक्रांति जैसे पर्व हमें याद दिलाते हैं कि धर्म का असली रूप सेवा और दया में छिपा है।

अगर हम इस दिन गाय को भोजन नहीं भी करा पाते, तो किसी भूखे जीव को खाना खिलाना भी उसी भावना को आगे बढ़ाता है।

निष्कर्ष

मकर संक्रांति के दिन गाय को गुड़, तिल, हरी घास और रोटी या खिचड़ी खिलाने की परंपरा केवल आस्था नहीं, बल्कि सेवा, दया और आत्मशुद्धि का प्रतीक है। यह हमें सिखाती है कि सच्चा पुण्य वही है, जिसमें किसी जीव का भला हो।

इस दिन की गई छोटी-सी सेवा भी जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकती है। उम्मीद है आपको हमारी वेबसाइट THE GYAN TV की यह जानकारी पसंद आई होगी।

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