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पिता के देहांत पर भी नहीं टूटा इस बेटी का हौसला, बसों की मरम्मत कर चलाती हैं घर

देश की बेटियां आज ओलंपिक में मेडल पर मेडल आ रही हैं। वहीं एक तरफ बेटियां ही हैं जो देश को संभाले हुए भी है। आज हम आपके सामने एक ऐसी बेटी की कहानी लेकर आए हैं उसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी। यह कहानी है 22 साल की बेटी सोनी की। सोने की नौकरी लगी और उसके तुरंत बाद ही उनके पिता की मृत्यु हो गई। परिवार में ऐसा कोई नहीं था जो घर का पालन पोषण कर सके। घर में हर कोई पिता के देहांत के कारण दुखी था। लेकिन 22 साल की इस बेटी ने हिम्मत नहीं आ रही और अपने परिवार को सहारा बनकर संभाला।

हिसार डिपो में करती है

परिवार का सहारा बन खड़ी हुई बेटी सोनी हिसार डिपो में नौकरी करती हैं। यहां मैकेनिकल हेल्पर के पद पर कार्यरत हैं। वह अपने आठ भाई और बहनों में तीसरे नंबर की बहन है। आपको बता दें कि सोनी की कमाई से ही घर का गुजारा चल रहा है। सुबह रोज सुबह उठकर हिसार डिपो जाती है और वहां पर बसों की मरम्मत करती हैं। उनके इस मेहनत और जज्बे को देखकर हर कोई हैरान रह जाते हैं।

मार्शल आर्ट की है खिलाड़ी

आपको बताना चाहेंगे कि सोनी मार्शल आर्ट की खिलाड़ी भी हैं। उनके पिता का 27 जनवरी 2019 को बीमारी के चलते निधन हो गया था। सोनी एक बहुत ही अच्छी मार्शल आर्ट की खिलाड़ी हैं और वह नेशनल चैंपियन भी रह चुकी हैं।

लगातार तीन बार जीत चुकी हैं स्वर्ण पदक

मार्शल आर्ट की बात करें तो वह है नेशनल प्लेयर रह चुकी हैं और राष्ट्रीय गेम में तीन बार लगातार स्वर्ण पदक ला चुकी है। सोनी को खेल कोटे से ही हिसार डिपो में मैकेनिकल हेल्पर की जॉब मिली है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मार्शल आर्ट एक ऐसा गेम है जिसको काफी सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसके अंदर खिलाड़ी के चेहरे पर वार करने की अनुमति नहीं होती है।

पिता ने खेलने के लिए किया था काफी प्रेरित

सोनी के पिता का हमेशा से ही सपना रहा था कि वह बड़ी होकर देश के लिए स्वर्ण पदक लाए। पिता के कहने पर ही साल 2016 में सोनी ने मार्शल आर्ट में खेलना शुरू किया था। उन्होंने अपने खेल में मेहनत और लगन के कारण राष्ट्रीय स्तर पर तीन बार स्वर्ण पदक विजेता है। सोनी पहले कबड्डी खेला करती थी वह अपने गांव में ही कबड्डी टीम का हिस्सा थी जिसके बाद उन्होंने मार्शल आर्ट में काफी मेहनत कर कर महारत हासिल की और राष्ट्रीय स्तर पर खेल कर स्वर्ण पदक जीते।

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