इलेक्ट्रिक कार को फुल चार्ज करने में कितनी बिजली लगती है, ख़ुद पढ़कर जाने

आज जब पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, तो लोग तेजी से इलेक्ट्रिक कार की तरफ़ रुख कर रहे हैं। लेकिन इलेक्ट्रिक कार खरीदने से पहले ज़्यादातर लोगों के मन में एक सवाल ज़रूर आता है — आख़िर एक इलेक्ट्रिक कार को फुल चार्ज करने में कितनी बिजली खर्च होती है?
कई लोग यह सोचकर ही रुक जाते हैं कि कहीं बिजली का बिल बहुत ज़्यादा न आ जाए। लेकिन सच्चाई इससे काफ़ी अलग है।

सबसे पहले बैटरी की क्षमता समझना ज़रूरी

इलेक्ट्रिक कार में जितनी बड़ी बैटरी होती है, उतनी ही ज़्यादा बिजली उसमें जाती है। बैटरी की क्षमता को यूनिट में नहीं, बल्कि किलोवॉट-घंटा में मापा जाता है। आसान भाषा में कहें तो, बैटरी जितनी बड़ी होगी, उतनी ज़्यादा बिजली चार्जिंग में लगेगी।

आमतौर पर भारत में मिलने वाली इलेक्ट्रिक कारों की बैटरी क्षमता लगभग 25 से 40 किलोवॉट-घंटा के बीच होती है।

फुल चार्ज करने में कितनी यूनिट बिजली लगती है

अब सीधे सवाल का जवाब समझ लेते हैं।अगर किसी इलेक्ट्रिक कार की बैटरी क्षमता लगभग 30 किलोवॉट-घंटा है, तो उसे शून्य से सौ प्रतिशत चार्ज करने में करीब 30 यूनिट बिजली लगेगी। अगर बैटरी 40 किलोवॉट-घंटा की है, तो फुल चार्ज में लगभग 40 यूनिट बिजली खर्च होगी।

यानि नियम बहुत सीधा है — जितनी किलोवॉट-घंटा की बैटरी, उतनी ही यूनिट बिजली।

घर पर चार्ज करने में कितना खर्च आता है

अब बात करते हैं खर्च की, क्योंकि असली चिंता वहीं होती है। मान लीजिए आपके इलाके में एक यूनिट बिजली की कीमत औसतन 7 से 8 रुपये है।
तो अगर आपकी कार को फुल चार्ज करने में 30 यूनिट बिजली लगती है, तो पूरा खर्च लगभग 210 से 240 रुपये आएगा।

इतनी चार्जिंग में इलेक्ट्रिक कार आराम से 250 से 300 किलोमीटर तक चल सकती है।अब इसे पेट्रोल या डीज़ल से तुलना करें, तो फर्क अपने-आप समझ आ जाएगा।

पब्लिक चार्जिंग स्टेशन पर खर्च ज़्यादा क्यों होता है

अगर आप घर की जगह पब्लिक चार्जिंग स्टेशन पर चार्ज करते हैं, तो खर्च थोड़ा बढ़ जाता है। इसकी वजह यह है कि वहां सिर्फ बिजली ही नहीं, बल्कि सुविधा और तेज़ चार्जिंग का पैसा भी लिया जाता है।

पब्लिक चार्जिंग स्टेशन पर:

  • प्रति यूनिट चार्ज ज़्यादा होता है

  • तेज़ चार्जिंग की सुविधा मिलती है

  • समय कम लगता है, लेकिन खर्च बढ़ जाता है

फिर भी कुल मिलाकर यह खर्च पेट्रोल-डीज़ल से कम ही पड़ता है।

हर बार फुल चार्ज करना ज़रूरी नहीं

एक और बात जो लोग अक्सर भूल जाते हैं, वह यह है कि इलेक्ट्रिक कार को हर बार शून्य से सौ प्रतिशत चार्ज करना ज़रूरी नहीं होता। अधिकतर लोग रोज़ाना सिर्फ 10 से 20 यूनिट की चार्जिंग करते हैं, जितनी रोज़ की ड्राइव के लिए काफ़ी होती है।

इसका मतलब यह हुआ कि:

  • रोज़-रोज़ भारी बिजली खर्च नहीं होता

  • बिजली का बिल धीरे-धीरे बढ़ता है, अचानक नहीं

चार्जिंग का समय भी बिजली खर्च से जुड़ा है

घर पर सामान्य चार्जर से कार चार्ज करने में ज़्यादा समय लगता है, लेकिन बिजली खर्च वही रहता है। तेज़ चार्जर समय बचाते हैं, लेकिन उनकी लागत ज़्यादा होती है। यानि समय बदलेगा, लेकिन यूनिट की गिनती बैटरी के हिसाब से ही तय होगी

तो क्या इलेक्ट्रिक कार से बिजली का बिल बहुत बढ़ जाता है

इस सवाल का जवाब है — नहीं।अगर महीने में औसतन 800 से 1000 किलोमीटर ड्राइव होती है, तो इलेक्ट्रिक कार पर आने वाला बिजली खर्च आम तौर पर पेट्रोल खर्च से कई गुना कम रहता है। यही वजह है कि लंबे समय में इलेक्ट्रिक कार जेब पर हल्की पड़ती है।

निष्कर्ष

इलेक्ट्रिक कार को फुल चार्ज करने में आमतौर पर 25 से 40 यूनिट बिजली लगती है, जो बैटरी की क्षमता पर निर्भर करता है। घर पर चार्ज करने पर इसका खर्च बहुत ज़्यादा नहीं होता और पेट्रोल-डीज़ल की तुलना में काफ़ी सस्ता साबित होता है। यही कारण है कि लोग अब इलेक्ट्रिक कार को सिर्फ पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि खर्च बचाने के लिए भी एक समझदारी भरा विकल्प मानने लगे हैं। उम्मीद है आपको हमारी वेबसाइट thegyantv.com की यह जानकारी पसंद आई होगी।

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