हर मिडिल क्लास परिवार का एक सपना होता है — अपना घर। किराए से छुटकारा, स्थिरता का एहसास और एक ऐसी जगह जो सच में “अपनी” हो। लेकिन 2026 में खड़े होकर अगर हम आने वाले 10 साल की तरफ देखें, तो एक सवाल उठता है — क्या घर खरीदना और मुश्किल होने वाला है?
प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ रही हैं, लोन महंगे हो रहे हैं और शहरों की रफ्तार अलग ही दिशा में जा रही है। आइए इस हकीकत को समझते हैं।
बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतें: रफ्तार सैलरी से तेज
पिछले कुछ सालों में बड़े शहरों में प्रॉपर्टी के दाम तेजी से बढ़े हैं। जो फ्लैट 8–10 साल पहले 60 लाख का था, वह आज 1–1.2 करोड़ तक पहुंच चुका है।
समस्या यह है कि सैलरी उतनी तेजी से नहीं बढ़ी जितनी प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ीं। अगर आय 5–8% की दर से बढ़ रही है और प्रॉपर्टी 10–15% की दर से, तो अंतर साफ है।आने वाले 10 साल में शहरीकरण और बढ़ेगा। लोग छोटे शहरों से बड़े शहरों की ओर जाएंगे। मांग बढ़ेगी, और मांग बढ़ेगी तो कीमत भी।

होम लोन और ब्याज दर का दबाव
घर खरीदने के लिए ज्यादातर लोग होम लोन लेते हैं। अगर ब्याज दर 8% से बढ़कर 9% या 10% हो जाए, तो EMI में बड़ा फर्क आता है। 20–25 साल के लोन में यह अंतर लाखों रुपये का हो सकता है।
आज 80 लाख के लोन पर EMI लगभग ₹70,000 के आसपास हो सकती है। अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो यही EMI और ऊपर जा सकती है। आने वाले वर्षों में आर्थिक स्थिति और वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव ब्याज दरों को प्रभावित कर सकते हैं। इसका सीधा असर घर खरीदने की क्षमता पर पड़ेगा।
टियर-2 शहरों का उभार
एक दिलचस्प बदलाव यह भी है कि लोग अब सिर्फ मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहते। टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी अच्छे स्कूल, अस्पताल और रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।
हो सकता है आने वाले 10 साल में बड़े शहरों की बजाय मध्यम शहरों में घर खरीदना आसान विकल्प बन जाए। कीमतें अपेक्षाकृत कम होंगी और जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। यानी मुश्किल पूरी तरह नहीं, बल्कि जगह के अनुसार अलग-अलग होगी।
किराए बनाम खरीद का बदलता समीकरण
पहले यह माना जाता था कि किराया देना “पैसा बर्बाद करना” है। लेकिन अब कई लोग निवेश और लिक्विडिटी को प्राथमिकता दे रहे हैं। अगर घर की कीमत बहुत ज्यादा है और EMI आय का बड़ा हिस्सा खा रही है, तो कुछ लोग किराए पर रहकर बाकी पैसा निवेश करना बेहतर मानते हैं।
आने वाले 10 साल में यह सोच और मजबूत हो सकती है, खासकर युवा पेशेवरों के बीच।
जमीन की कमी और लाइफस्टाइल बदलाव
बड़े शहरों में जमीन सीमित है। जैसे-जैसे आबादी बढ़ेगी, वैसे-वैसे अच्छे लोकेशन में प्रॉपर्टी और महंगी होगी। साथ ही, लोग अब बड़े घर की बजाय बेहतर लोकेशन और सुविधाओं को प्राथमिकता देने लगे हैं। इसका मतलब है कि छोटे लेकिन महंगे अपार्टमेंट आम हो सकते हैं।
क्या सच में घर खरीदना नामुमकिन हो जाएगा?
पूरी तरह नामुमकिन नहीं। लेकिन चुनौती जरूर बढ़ सकती है।
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डाउन पेमेंट के लिए ज्यादा बचत करनी होगी
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EMI का बोझ ज्यादा महसूस हो सकता है
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सही लोकेशन चुनना और मुश्किल होगा
लेकिन सही प्लानिंग, समय पर निवेश और बजट अनुशासन से घर खरीदना अभी भी संभव रहेगा।

असली सवाल: कब और कहाँ खरीदें?
घर खरीदना सिर्फ आर्थिक फैसला नहीं, भावनात्मक भी है। अगर आपकी नौकरी स्थिर है, शहर तय है और EMI आपकी आय का 35–40% से ज्यादा नहीं ले रही, तो घर खरीदना समझदारी हो सकता है। लेकिन अगर आय अनिश्चित है और लोकेशन बार-बार बदलनी है, तो जल्दबाजी नुकसान कर सकती है।
निष्कर्ष
आने वाले 10 साल में घर खरीदना आसान नहीं होगा, खासकर बड़े शहरों में। कीमतें बढ़ेंगी, ब्याज दरें बदलेंगी और प्रतिस्पर्धा तेज होगी। लेकिन असली फर्क आपकी तैयारी से पड़ेगा।
सही समय, सही जगह और सही वित्तीय योजना के साथ अपना घर अभी भी सपना नहीं, हकीकत बन सकता है। घर लेना मुश्किल हो सकता है, असंभव नहीं। उम्मीद है आपको हमारी वेबसाइट THE GYAN TV का ये लेख ज़रूर पसंद आया होगा.
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