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बचपन में छोड़ा घर, अब 18 साल बाद आईएएस बनकर वापस लौटा

बचपन में बच्चे बड़े ही शैतान होते हैं और ज्यादातर खेलना कूदना ही पसंद करते हैं। बचपन में काफी बार बच्चे ऐसे कदम उठा लेते हैं जो उन्हें एक अलग रास्ते पर ले जाते हैं वह रास्ता कभी अच्छा तो कभी बुरा हो सकता है। कुछ बच्चे बचपन से ही दुनिया में अपना नाम बनाने की सोच लेते हैं और इसके बाद वह इसी नाम को पाने के लिए मेहनत करने लगते हैं। कुछ बच्चों का पढ़ाई के प्रति इतना जज्बा होता है कि वह घर से दूर रहकर भी स्कूल जाना चाहते हैं ऐसा ही एक मामला सामने आया है जिसमें एक बच्चे को गांव में स्कूल ना होने के कारण है मजबूरी में घर छोड़ना पड़ा लेकिन इसके बाद वह वापस घर लौटा तब उसके शरीर पर आईएएस की वर्दी थी।

बिहार के इस युवक ने बचपन में छोड़ दिया था घर

बिहार एक ऐसा राज्य है जहां से हर साल काफी संख्या में यूपीएससी एग्जाम क्लियर करने वाले युवा होते हैं। बिहार के बच्चों को काफी होनहार माना जाता है और इसी के बदौलत है यूपीएससी के नतीजे बिहार के युवाओं के सबसे अधिक आते हैं। बिहार ने काफी वर्षों से देश को सबसे अधिक आईएएस अधिकारी दिए हैं। बिहार के जमुई जिले के रहने वाले सुमित कुमार एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं। गांव में रहने वाले सुमित कुमार बचपन में पढ़ना चाहते थे लेकिन उनके गांव में ऐसी कोई सुविधा नहीं थी जो उनको जीवन में ऊंचाइयों की ओर ले जा सके इसके बाद उन्होंने 8 साल की उम्र में ही घर छोड़ दिया और अपने भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए घर से दूर रहकर पढ़ाई करने लगे।

सुमित ने गरीबी में अपना जीवन बताया था तथा उसके पिता सुसाल वाणवाल ने भी उन्हें सपोर्ट किया। सुमित ने 2007 में दसवीं क्लास उत्तरण की इसके बाद 2009 में 12वीं क्लास करने के बाद उनका आईआईटी कानपुर में चयन हो गया सुमित बचपन से ही काफी होशियार विद्यार्थियों में गिने जाते थे जब उन्होंने आईआईटी कानपुर से बीटेक की पढ़ाई पूरी कर ली तो इसके बाद उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा देने का फैसला किया।

संघर्ष भरे जीवन के बाद पास की यूपीएससी की परीक्षा

सुमित ने आईआईटी कानपुर से करने के बाद यूपीएससी में जाने का फैसला किया था। इसके बाद सन् 2017 में उन्होंने 493 रैंक हासिल की और उन्हें डिफेंस कैडर मिला। लेकिन यह नौजवान यहीं रुकने वाला नहीं था और उन्होंने वापस 2018 में यूपीएससी की परीक्षा दी इस बार उन्होंने पूरे देश में 53 वी रैंक हासिल की इसके बाद सुमित का सपना साकार हो गया। सुमित ने बताया कि उनका इस सफलता का रास्ता आसान नहीं था उन्होंने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया है छोटी सी उमर में घर छोड़ने के बाद उन्हें काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ा क्योंकि उनके पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वह बाहर रहकर आसानी से पढ़ाई कर पाते हैं। सुमित अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देते हैं और हमेशा युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

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