सर्दियों का मौसम आते ही घरों में देसी चीज़ें बनने लगती हैं। उन्हीं में से एक हैं तिल के लड्डू। मकर संक्रांति के आसपास तो तिल के लड्डू लगभग हर घर में बनते हैं। हमारे बड़े-बुज़ुर्ग हमेशा कहते आए हैं कि ठंड में तिल ज़रूर खाना चाहिए, और इसके पीछे बहुत ही आसान वजहें हैं।
सबसे पहली बात, तिल शरीर को गर्म रखते हैं। सर्दियों में ठंड के कारण शरीर में सुस्ती आ जाती है। ऐसे में तिल के लड्डू खाने से शरीर को अंदर से गर्माहट मिलती है और ठंड कम महसूस होती है। यही वजह है कि ठंड के मौसम में तिल को खास माना जाता है।
दूसरी बात, तिल के लड्डू शरीर को अच्छी एनर्जी देते हैं। इनमें तिल, गुड़ और देसी घी होता है। ये तीनों चीज़ें मिलकर शरीर को ताकत देती हैं। सुबह एक तिल का लड्डू खाने से दिनभर काम करने का मन बना रहता है और थकान भी कम लगती है।

तीसरी बात, हड्डियों के लिए तिल के लड्डू अच्छे माने जाते हैं। सर्दियों में कई लोगों को हड्डियों और जोड़ों में जकड़न महसूस होती है। ऐसे में तिल के लड्डू शरीर को सपोर्ट देते हैं और मजबूती बनाए रखने में मदद करते हैं। इसलिए बड़े लोग सर्दियों में तिल खाने की सलाह देते हैं।
चौथी बात, त्वचा और बालों के लिए भी तिल फायदेमंद माने जाते हैं। ठंड में त्वचा रूखी हो जाती है और होंठ फटने लगते हैं। तिल के लड्डू खाने से शरीर को अंदर से पोषण मिलता है, जिससे त्वचा में नमी बनी रहती है और बाल भी अच्छे रहते हैं।
पांचवी बात, पेट के लिए भी तिल के लड्डू ठीक रहते हैं। सही मात्रा में खाने से पेट हल्का रहता है और खाना अच्छे से पचता है। सर्दियों में पेट से जुड़ी छोटी-मोटी परेशानियाँ आम होती हैं, ऐसे में तिल के लड्डू मददगार माने जाते हैं।

अब सवाल आता है कि कितने तिल के लड्डू खाने चाहिए। सर्दियों में रोज़ एक तिल का लड्डू काफी होता है। ज़्यादा खाने की ज़रूरत नहीं होती। सुबह या दोपहर में खाना अच्छा माना जाता है। अगर चाहें तो दूध के साथ भी खा सकते हैं।
आख़िरी बात
तिल के लड्डू सिर्फ मिठाई नहीं होते, बल्कि सर्दियों की देसी आदत हैं। स्वाद भी अच्छा, शरीर को गर्माहट भी और दिनभर के लिए ताकत भी। यही वजह है कि आज भी सर्दियों में तिल के लड्डू हर घर में बनाए जाते हैं।
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