जब भी अमीरों की ज़िंदगी की बात होती है, तो सबसे पहले जिन चीज़ों का ज़िक्र होता है, उनमें प्राइवेट जेट का नाम ज़रूर आता है। फिल्मों, बिज़नेस टायकून और बड़े सेलिब्रिटीज़ को देखकर अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि आख़िर एक प्राइवेट जेट खरीदने में कितना खर्च आता है।
कई लोग सोचते हैं कि बस जेट खरीद लिया और काम खत्म, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज़्यादा बड़ी और महंगी होती है।
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि प्राइवेट जेट खरीदने की असली कीमत क्या होती है और इसके साथ कौन-कौन से खर्च जुड़े होते हैं।
प्राइवेट जेट की कीमत कहां से शुरू होती है
प्राइवेट जेट की कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस साइज और किस क्षमता का जेट लेना चाहते हैं। छोटे प्राइवेट जेट, जिन्हें आमतौर पर बिज़नेस ट्रैवल के लिए इस्तेमाल किया जाता है, उनकी कीमत लगभग 30 से 50 करोड़ रुपये से शुरू होती है।

ये जेट कम दूरी की उड़ानों के लिए होते हैं और इनमें सीमित संख्या में लोग सफर कर सकते हैं। आम बिज़नेस मीटिंग्स और घरेलू यात्रा के लिए ऐसे जेट काफी माने जाते हैं।
मिड साइज और लग्ज़री प्राइवेट जेट का खर्च
अगर आप थोड़ा बड़ा और ज्यादा सुविधाओं वाला प्राइवेट जेट चाहते हैं, तो कीमत तेज़ी से बढ़ जाती है। मिड साइज प्राइवेट जेट की कीमत आमतौर पर 100 से 300 करोड़ रुपये के बीच होती है।
इन जेट्स में: आरामदायक केबिन, मीटिंग एरिया, बेहतर रेंज, ज्यादा स्पीड जैसी सुविधाएं मिलती हैं। यही वजह है कि बड़े बिज़नेसमैन और इंटरनेशनल ट्रैवल करने वाले लोग इन्हें पसंद करते हैं।
अल्ट्रा लग्ज़री प्राइवेट जेट कितना महंगा होता है
अब बात करें उस श्रेणी की, जिसे आम आदमी सिर्फ तस्वीरों और फिल्मों में देखता है। अल्ट्रा लग्ज़री प्राइवेट जेट की कीमत 500 करोड़ रुपये से शुरू होकर 1,000 करोड़ रुपये या उससे भी ज़्यादा तक जा सकती है।
इन जेट्स में: बेडरूम, बाथरूम, लाउंज, डाइनिंग एरिया तक मौजूद होता है। कुछ जेट्स तो छोटे उड़ते हुए महलों जैसे होते हैं।
सिर्फ खरीदना ही नहीं, चलाना भी महंगा
यहां एक बहुत बड़ी बात समझनी ज़रूरी है। प्राइवेट जेट खरीदना ही सबसे बड़ा खर्च नहीं होता, बल्कि उसे चलाना उससे भी ज़्यादा महंगा पड़ता है। हर साल जेट पर आने वाले खर्चों में शामिल होते हैं: ईंधन का खर्च, पायलट और क्रू की सैलरी, मेंटेनेंस और सर्विस, पार्किंग और हैंगर चार्ज कुल मिलाकर, एक प्राइवेट जेट को साल भर चलाने में 5 से 20 करोड़ रुपये या उससे ज़्यादा का खर्च आ सकता है।

टैक्स और कागज़ी खर्च भी कम नहीं
प्राइवेट जेट खरीदते समय टैक्स और कस्टम ड्यूटी भी एक बड़ा हिस्सा बनते हैं। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस और अलग-अलग परमिशन लेने में भी अच्छी-खासी रकम खर्च होती है। कई बार ये खर्च जेट की कीमत के ऊपर कई करोड़ रुपये और जोड़ देते हैं, जिसके बारे में लोग पहले नहीं सोचते।
क्या हर किसी के लिए सही है प्राइवेट जेट
प्राइवेट जेट सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि एक बड़ी ज़िम्मेदारी भी है। यह उन्हीं लोगों के लिए फायदेमंद होता है: जिन्हें लगातार हवाई यात्रा करनी पड़ती है, जिनका समय बेहद कीमती होता है, जो बड़े स्तर पर बिज़नेस संभालते हैं. आम आदमी के लिए यह सपना देखने तक ही सीमित रहता है, क्योंकि इसका खर्च साधारण सोच से कहीं बाहर होता है।
चार्टर विकल्प क्यों चुनते हैं कई लोग
इसी भारी खर्च की वजह से कई लोग प्राइवेट जेट खरीदने की बजाय चार्टर सेवा लेना ज़्यादा समझदारी मानते हैं। इससे: करोड़ों का एकमुश्त खर्च नहीं करना पड़ता, जब ज़रूरत हो तभी जेट मिलता है, मेंटेनेंस की चिंता नहीं रहती. यही वजह है कि चार्टर विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
निष्कर्ष
प्राइवेट जेट खरीदना सिर्फ अमीरी का नहीं, बल्कि बहुत बड़ी आर्थिक तैयारी का मामला है। इसकी कीमत 30 करोड़ रुपये से शुरू होकर 1,000 करोड़ रुपये से भी ऊपर जा सकती है, और हर साल चलाने का खर्च अलग से होता है। इसलिए जब भी आप किसी को प्राइवेट जेट में उड़ते देखें, तो समझ जाइए कि उसके पीछे सिर्फ शौक नहीं, बल्कि बहुत बड़ा खर्च और जिम्मेदारी छुपी होती है।
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