विराट कोहली की ज़िंदगी हमेशा से ही लोगों के लिए चर्चा का विषय रही है। मैदान पर उनका गुस्सा, जोश और जीतने की भूख तो पूरी दुनिया ने देखी है, लेकिन पिछले कुछ समय से कोहली का एक बिल्कुल अलग रूप सामने आया है। यह बदलाव तब साफ दिखने लगा, जब विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा प्रेमानंद जी महाराज की शरण में पहुंचे। यह सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं थी, बल्कि विराट की ज़िंदगी में आए मानसिक और भावनात्मक बदलाव की शुरुआत मानी जाती है।
पहले वाला विराट और आज का विराट, फर्क साफ दिखता है
कुछ साल पहले तक विराट कोहली मैदान पर बेहद आक्रामक नजर आते थे। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा, दबाव में झुंझलाहट और आलोचनाओं का असर—ये सब चीज़ें उनके खेल और निजी जीवन पर असर डालती थीं। खराब फॉर्म के दौरान विराट खुद भी कई बार यह मान चुके हैं कि वह अंदर से काफी परेशान थे।

लेकिन प्रेमानंद जी महाराज से मिलने के बाद विराट के व्यवहार में एक अजीब-सी शांति देखने को मिली। मैदान पर वही जुनून रहा, लेकिन गुस्सा काफी हद तक कम हो गया।
अध्यात्म से मिला मानसिक सुकून
प्रेमानंद जी महाराज की शिक्षाएं सादगी, भक्ति और आत्म-शांति पर आधारित हैं। कहा जाता है कि विराट कोहली ने वहां जाकर यह समझा कि हर चीज़ पर कंट्रोल करना ज़रूरी नहीं होता। मेहनत करना हमारे हाथ में है, लेकिन नतीजे छोड़ देना भी सीखना पड़ता है।
इस सोच का असर विराट के खेल में भी दिखा। वह अब ज़्यादा शांत रहते हैं, फैसलों को स्वीकार करते हैं और खुद पर अनावश्यक दबाव नहीं डालते।
अनुष्का शर्मा का भी बड़ा रोल
इस बदलाव में अनुष्का शर्मा का योगदान भी बहुत बड़ा माना जाता है। अनुष्का पहले से ही अध्यात्म और सादगी में विश्वास रखती हैं। प्रेमानंद जी महाराज की शरण में जाना विराट के लिए भी एक नई दिशा लेकर आया। दोनों अब ज़िंदगी को सिर्फ जीत-हार से नहीं, बल्कि संतुलन और शांति से देखने लगे हैं।
खेल पर पड़ा पॉजिटिव असर
जब मन शांत होता है, तो प्रदर्शन अपने आप बेहतर हो जाता है। विराट कोहली के साथ भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। आलोचनाओं से दूर रहकर, बिना ज़्यादा बोले उन्होंने अपने खेल पर ध्यान दिया। नतीजा यह हुआ कि उनका आत्मविश्वास लौटा और मैदान पर उनका फोकस पहले से ज़्यादा मजबूत दिखने लगा।

अब विराट ज़्यादा मुस्कुराते नजर आते हैं, चाहे मैच का नतीजा कुछ भी हो। यही मानसिक मजबूती किसी भी खिलाड़ी की असली ताकत होती है।
सिर्फ क्रिकेट नहीं, ज़िंदगी भी बदली
प्रेमानंद जी महाराज की शरण में जाने के बाद विराट कोहली की सोच सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं रही। परिवार, सेहत, मानसिक शांति और सादगी—ये सब उनकी प्राथमिकता बन गई। यही वजह है कि आज विराट कोहली सिर्फ एक महान खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि एक संतुलित इंसान के रूप में भी देखे जा रहे हैं।
आख़िरी बात
विराट कोहली की यह यात्रा बताती है कि ज़िंदगी में सफलता के साथ-साथ शांति भी कितनी ज़रूरी होती है। प्रेमानंद जी महाराज की शरण में जाकर विराट ने शायद यही सीखा कि असली जीत बाहर नहीं, बल्कि अंदर होती है।
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