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फेल होने से लेकर UPSC क्लियर करके ऑफिस बनने तक का सफर, पढिये सुजीत बाजपाई की प्रेरणादायक कहानी

फेलियर से ऑफिसर बनने का सफ़र

आज हम बात करेगे उत्तर प्रदेश के रहने वाले विरेन्दर वाझपई की ,जो एक माध्यम वर्गीय परिवार के सम्बंध रखते थे। जिंदगी में इतने उतार-चढ़ाव आने के बाद भी विरेन्दर ने हार नही मानी और लगातार मेहनत करता रहा और फाइनली विरेन्दर ने खुद के यू.पी.एस.सी क्रैक करने के बहुत बड़े सपने को मुमकिन के लिया और खुद के माता- पिता की छाती गर्व के छोड़ी कर दी।जब विरेन्दर जी से न्यूज़ रिपोर्टर ने इनका इंटरव्यू लिया ,तो वीरेन्द्र वाझपई का जवाब सुनकर न्यूज़ रिपोर्टर हैरान हो गयी।
ऐसा क्या बोल दिया वीरेन्द्र जी ने की न्यूज़ रिपोर्टर भी सदमे में पड़ गयी? क्या था ऐसा ?

वीरेंद्र ने खुद के इंटरव्यू में बताया के उनका ये यू.पी.एस.सी क्लियर करने का सपना कुछ ज्यादा पुराना नही है। यह कुछ एक-दो साल ही पुराना हैं। वीरेंद्र ने बताया की “बचपन में उन्हें पड़ने में बिल्कुल भी इंटरेस्ट नही था, यहां तक की मैं दसवीं कक्षा में भी थर्ड डिवीज़न ही पास हुआ था ओर बारवी कक्षा में तो फैल है हो गया था।उसके बाद अगले साल मैंने बारवी कक्षा पास की।”
यही सुन के रिपोर्टर अचुम्बे में पड़ गयी और सोचने लगी ऐसा कैसे हो सख्त है।
ऐसा क्या टर्निंग पॉइंट आया विरेन्दर की लाइफ में जिससे उसने यू.पी.एस.सी क्लियर करने की ठान ली ओर ऐसा क्या हुआ जिसके कारण वीरेंद्र का पढ़ाई में मन लगने लगा ?

इन सवालों के जवाब भी वीरेंद्र वाझपई ने है दिए

ऐसी क्या घटना था जिसके बाद विरेन्दर जी के जीवन मे पूरी तरह से बदलाव आ गया और पड़ने में भी इंटरेस्ट आने लगा और यू.पी.एस.सी क्रैक करने का खयाल दिमाक में आया और उसे ही जीवन का एक मात्र लक्ष्य बना लिया।

वीरेंद्र के कॉलेज मतलब विश्वविद्यालय की पढ़ाई पूरी होने के बाद उसे लोगो के ताने सुनने को मिलते थे, क्योंकि वह दिन भर फालतू है बैठा रहता था और पूरे गांव मे आवरो के तरह डोलता रहता था,ओर सबसे लड़ाई दंगे करते रहता था। ऐसे में वीरेंद्र में परिवार के लोगो को उस से ज्यादा सुनने को मिलता था , उसके पिताजी को लोग-बाग टोकते थे ओर बोलते थे के कैसे औलाद पैदा करी हैं तुमने।बस यही बात विरेन्दर को चुब गयी और उसी दिन से उसने सारे गलत काम छोड़ दिये और दिन-रात पढ़ाई में जुट गया और उसी दिन उसने ठान ली की कुछ ऐसा करुगा जिस से यही सब लोग मेरे बापू से हाथ जोड़कर माफी मागेंगे, तभी उसने यू.पी.एस.सी क्लियर करने का सपना देखा।

सपना देखना बड़ी बात नही है उसे साकार करना बड़ी बात है!

वीरेंद्र को खुद के सपने को पूरा करने में बहुत समय लगा लेकिन उसने हार नही मानी और वो खुद का बेस्ट देता रहा।
यू.पी.एस.सी विरेन्दर ने पहली बार मे ही नही क्रैक करी उसने 3 साल के कड़ी मेहनत के बाद यू.पी.एस.सी क्लियर करके खुद के सपने को अंजाम दिया ओर सबके सानमे 1 उदहारण सेट कर दिया फेलियर से सक्सेस का।
वीरेंद्र ने साबित कर दिया की रिजल्ट नही डिसाइड करता की तुम कोंन हो तुम्हारी फाइनली में जो सक्सेस हैं वो तय करती है तुम कोन हो।

जीवन में अगर आप कुछ ठान लेते हो तो आप कुछ भी कर सख्ते हो क्योंकि दुनिया मे कुछ भी असंभव नही है। बस जरूरत है तो सिर्फ कंसंट्रेशन की ओर मेहनत की।
इंग्लिश में एक कहावत है की ” कीप ट्राइंग हार्ड अंटिल यु गेट सक्सेस!” ( keep trying hard until you get success.)

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