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डॉक्टरी छोड़ पहले ही प्रयास में बनी आईएएस पुरे भारत में दूसरी रैंक, इस वजह से छोड़ी डॉक्टर की पढाई

अगर आप किसी चीज को शिद्दत से चाहते हैं तो उस चीज को पाने से आपको कोई नहीं रोक सकता। कौन कहता है आसमान में छेद नहीं होता एक पत्थर तो तबियत से उछाल कर देखो यारो। सब ने अपनी लाइफ में कुछ ना कुछ सपने देखे होते हैं उन सपनों को पूरा करने के लिए आप बहुत मेहनत भी करते हैं। मेहनत करने वाले की कभी हार नहीं होती और आखिर का आपको वह चीज मिल ही जाती है आज हम आपको एक ऐसी कहानी बताने जा रहे हैं जो आपको प्रेरणा देगी।

क्या कहानी है रेनू राज की जो जिन्होंने डॉक्टरी छोड़कर आईएएस का एग्जाम दिया और वह आज एक आईएएस अधिकारी हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि रेनू राज ने अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई कंप्लीट कर ली थी और वह एक अच्छी डॉक्टर भी थी लेकिन उनका सपना कुछ और था वह आईएएस बनना चाहती थी जिसके बाद उन्होंने यूपीएससी का एग्जाम दिया और अपने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया रैंक में दूसरा स्थान लाकर आईएएस अफसर बन गई।

अपने गांव में ही की प्रारंभिक पढ़ाई

रेनू राज की बात करें तो वह केरल के कोट्टायम की रहने वाली हैं उन्होंने अपने प्रारंभिक शिक्षा अपने ही गांव में सेंट थेरेसा हायर सेकेंडरी स्कूल से की है उसके बाद उन्होंने अपनी मेडिकल की पढ़ाई को करने के लिए वो टाइम के ही गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया और अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी की। मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह डॉक्टर बन गई थी लेकिन उनका सपना आईएएस अधिकारी बनने का था।

क्यों छोड़ी डॉक्टरी

जैसा कि हमने बताया कि रेनू रात का सपना हमेशा सही आईएएस अधिकारी बनने का काम खबरों के अनुसार रेनू राज ने बताया कि उन्होंने 2014 में अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई के साथ-साथ यूपीएससी की पढ़ाई भी सुख करनी शुरू कर दी थी। इसी के चलते उनके पहले ही प्रयास में उनका ऑल और इंडिया दूसरा स्थान आया। अभी के समय में वह अपना आईएएस का कार्यभार संभाल रही है आपको यह जानकर हैरानी होगी कि रेनू के पिता भी एक सेवा निवृत सरकारी कर्मचारी रह चुके हैं।

बचपन से ही बनना चाहती थी आईएएस

रेनू का कहना है कि वह बचपन से ही आईएएस अधिकारी बनना चाहती थी। इसके लिए उन्होंने नियमित रूप से अपनी आईएएस की पढ़ाई जारी रखी और आईएएस की पढ़ाई के लिए उन्होंने बहुत मेहनत की उन्होंने बचपन में ही ठान लिया था कि वह बड़ी अधिकारी बनेगी। उनका सपना था कि वह बड़ी होकर अपने गांव की गरीब लोगों की और असहाय लोगों की मदद करेंगी और वह ऐसा तब ही कर पाएंगे जब वह एक बड़ी अधिकारी हो और उनके हाथ में पावर हो।

 

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