होली अब पहले जैसी क्यों नहीं रही, बदलती परंपराएँ या नई सोच है कारण, ख़ुद जाने पढ़कर
होली का नाम आते ही दिमाग में रंग, पिचकारी, हंसी और गले मिलना याद आता है। बचपन में होली का मतलब था — सुबह से मोहल्ले में शोर, दोस्तों की टोली, बाल्टी भर रंग और शाम तक थककर घर लौटना। लेकिन क्या आपने महसूस किया है कि अब होली पहले जैसी नहीं रही? रंग तो … Continue reading होली अब पहले जैसी क्यों नहीं रही, बदलती परंपराएँ या नई सोच है कारण, ख़ुद जाने पढ़कर
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