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भारत में मोजूद है यमराज का घर,यहाँ रात में रुकने वाला कभी नहीं वापिस लोटता

दोस्तों दुनिया में कुछ ऐसे अजीबो गरीब रहस्य है जो आज भी विज्ञानं के लिए चुनोती बने हुए है ,विज्ञानं ने पूरी खोज करने के बाद भी कोई सटीक हल नहीं निकला .यहाँ पर ऐसे घटनाये होती है जो इन्सान के दिमाग में बस जाती है ,आज हम आपको ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे है जहा रात को रुकने वाला आदमी कभी भी वापिस नहीं लोटता .

यमराज का द्वार 

दरसल ये जगह भारत के पडोसी देश तिब्बत में मोजूद है ,ये एक स्तूप है और तिब्बत के लोग इसको चोर तेन कांग नगई कहते है .इसका मतलब होता है दो पेरो वाला स्तूप और भारत के लोग इस स्तूप को मृत्यु के देवता यमराज के घर का परवेश द्वार भी कहते है .यही कारण है की लोग इसको यम द्वार यानि की यमराज के घर का द्वार भी कहते है ,यम द्वार तिब्बत के गाव दार चेन से 15 किलोमीटर दूर 15500 फूट की उचाई पर बना हुआ है .एक दिलचस्प बात ये भी है की ये द्वार कैलाश जाने वाले रास्ते में पड़ता है .

इस स्तूप के बारे में एक कहानी प्रचलित है की यहा पर रात को रुकने वाला कोई भी आदमी वापिस नहीं लोटता ,ऐसे कई घटनाये हो चुकी है लेकिन इसके पीछे के कारणों का खुलासा आज तक नहीं हो पाया है .साथ ही ये मंदिर नुमा परवेश द्वार किसने बनाया इसका कोई प्रमाण नहीं ,बहुत से शोध हो चुके है लेकिन सच का आज तक भी पता नहीं चल सका .

तिब्बत के लोग करते है पूजा 

यम द्वार पर तिब्बत के लोग अपने शरीर के बाल नोच कर चडाते है ,उनका मानना है की बाल त्यागना शरीर त्यागने के बराबर ही है .वही बोद्ध भिक्षु यहा आ कर अपने प्राण त्याग करते है ताकि उनको मोक्ष की प्राप्ति हो सके ,उनका मानना है की यहाँ पर प्राण त्यागने वालो को जरूर ही मोक्ष की प्राप्ति होगी .कुछ लोगो का कहना है की यम द्वार पर भूतो का बसेरा है जो राहगीर को मार देते है .

आपको बता दे की ये स्तूप किसने बनाया है इसका आज तक भी पता नहीं चल पाया है ,यहा आये दिन अजीब घटनाये होती रहती है ,और इन घटनाओ का विज्ञानं के पास भी कोई जवाब नहीं है .

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