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किसका होगा अफगानिस्तान में शासन, क्या पुराने राष्ट्रपति को भी मिलेगी कोई भूमिका ?

अफगानिस्तान में लोकतंत्र खत्म हो चुका है और तालिबान का कब्जा हो चुका है। हाल ही में कुछ दिनों पहले तालिबान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर अपना कब्जा जमा लिया और इसी के साथ है वहां पर मौजूद राष्ट्रपति भवन पर भी अपना कब्जा कर लिया। तालिबानियों की राष्ट्रपति भवन से काफी तस्वीरें सामने आई हैं। आपको बता दें कि पिछले साल अमेरिका ने तालिबानियों से वादा किया था कि वह 2021 में अपनी सेना को अफगानिस्तान से हटा लेंगे और फिलहाल है लगभग सभी अमेरिकी सैनिक वापस लौट चुके हैं। अब तालिबान अफगानिस्तान में अपने सत्ता चाहता है और इसके लिए हर एक कोशिश भी कर रहा है।

तालिबान को सत्ता चलाने का अनुभव है जीरो

तालिबानियों ने अफगानिस्तान पर कब्जा तो कर लिया और वहां पर सरकार भी बनाना चाहते हैं लेकिन सबसे बड़ी चुनौती यह है कि तालिबान को सत्ता से लाने का अनुभव बिल्कुल भी नहीं है क्योंकि सत्ता चलाने के लिए राजनीति के साथ साथ है कूटनीति का होना भी बहुत जरूरी होता है। सत्ता चलाने के लिए एक देश को आर्थिक तौर पर भी काफी मजबूत होना पड़ता है और तालिबान के पास इतनी आरती मजबूती नजर नहीं आती है। खबरें सामने आई है कि अफगानिस्तान के लोग भी तालिबान के विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं और तालिबान के झंडों को उखाड़ रहे हैं।

पूर्व नेताओं को लेकर तालिबान बना सकता है सरकार

तालिबान के शीर्ष नेताओं को सरकार चलाने का बिल्कुल भी अनुभव नहीं है और भी अच्छी तरह जानते हैं कि सिर्फ बंदूक की नोक के सहारे पूरे देश में सरकार को नहीं चलाया जा सकता है। इसके बाद तालिबानी कुछ पूर्व नेताओं से भी बातचीत कर रहे हैं और उन्हें अपने साथ मिलाकर सरकार बना सकते हैं। अफगानिस्तान के मौजूदा राष्ट्रपति अशरफ गनी पहले ही देश छोड़कर भाग गए हैं। तालिबानी पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई से बातचीत कर सकते हैं क्योंकि उन्होंने बयान दिया था कि वह देश छोड़कर नहीं जाएंगे और तालिबान के साथ बातचीत करके कोई ना कोई हल जरूर निकालेंगे।

कौन होगा अफगानिस्तान का राष्ट्रपति

तालिबान ने राजधानी काबुल पर तो कब्जा कर लिया लेकिन इसके बाद सरकार बनाने में काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है तालिबान के सह संस्थापक और राजनीतिज्ञ मुल्लाह अब्दुल बिरादर को अफगानिस्तान का होने वाला राष्ट्रपति माना जा रहा है। गनी बिरादर फिलहाल सबसे ताकतवर नेता हैं और काफी सालों से तालिबान को चला रहे हैं। 1996 में जब तालिबान की सरकार बनी थी उस समय बिरादर डिप्टी रक्षा मंत्री रहे थे। गनी बिरादर के अलावा हिबतुल्ला अखुंदजादा भी तालिबान के वरिष्ठ नेता हैं।

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