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अफगानिस्तान में सिख छोड़ आए 500 साल की विरासत, लेकिन नहीं भूले गुरु ग्रंथ साहिब

अफगानिस्तान में फिलहाल हालात काफी नाजुक हैं वहां रह रहे लोगों के लिए यह बहुत ही कठिन परिस्थितियों का समय है। अफगानिस्तान में तालिबान ने राजधानी काबुल पर कब्जा कर लिया। इसके अलावा काफी अन्य प्रांतों को भी अपने अधिकार में ले लिया है। अब अफगानिस्तान में रह रहे लोग वहां से निकलने का प्रयास कर रहे हैं जिनमें भारत के भी कुछ ऐसे लोग हैं जो वहां से आना चाहते हैं और इसके लिए भारत सरकार उनकी मदद भी कर रही है और काफी लोगों को अफगानिस्तान से भारत लाया गया है।

भारत ने किया 146 लोगों का रेस्क्यू

कल 23 अगस्त को भारत ने अपने तीन एयरफोर्स विमानों से अफगानिस्तान में रह रहे 146 लोगों को वहां से बाहर निकाल कर हिंदुस्तान लेकर आए हैं। आपको बता दें कि इससे पहले भी भारतीय एयरफोर्स अफगानिस्तान से लोगों का रेस्क्यू कर चुकी है जिसमें एक विमान में लगभग 150 लोग भारत आए थे जिसके बाद वह भारत में अलग-अलग जगहों पर चले गए। कल एक विमान में 46 लोग भारत पहुंचे जिनमें लगभग सभी हिंदू और सिख थे।

सिख पीछे छोड़ आए 500 साल की विरासत लेकिन नहीं भूले गुरु ग्रंथ साहिब

अफगानिस्तान में माना जाता है कि सिख लगभग पिछले 500 सालों से रह रहे हैं। फिलहाल अफगानिस्तान के मौजूदा हालात देखकर वहां रह रहे सिख वहां से निकलना चाहते हैं और काफी सिख समुदाय के लोग भारत भी आ चुके हैं। कल जब 46 हिंदू और सिख को भारत लाया जा रहा था उस समय एक फोटो और वीडियो जमकर वायरल हुआ है। इस वीडियो में दिखाया गया है कि सिख समुदाय के लोग अफगानिस्तान से निकलते समय कुछ भी साथ लेकर नहीं आए अपना घर का सब कुछ पीछे छोड़ कर आ गए लेकिन गुरु ग्रंथ साहिब को नहीं भूल पाए। इस वीडियो में सिख गुरु ग्रंथ साहिब को अपने सर पर रखे हुए नजर आ रहे हैं जिसके बाद यह खूब वायरल हो गया यह वीडियो अफगानिस्तान की राजधानी काबुल एयरपोर्ट का है।

सिख समुदाय ने बताया गुरु ग्रंथ साहिब सबसे बढ़कर,

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के एयरपोर्ट से वायरल हुए एक वीडियो में 3 सिख अपने सिर पर गुरु ग्रंथ साहिब लिए हुए नजर आ रहे हैं। जब उनसे पूछा गया कि आप यह क्यों लेकर आए और बाकी का सामान कहां है तो उन्होंने बताया कि हम अपने घर का सब कुछ पीछे छोड़ कर आ गए हैं लेकिन गुरु ग्रंथ साहिब को नहीं छोड़ सकते क्योंकि यह हमारे लिए सबसे बढ़कर है। आपको बता दें कि अफगानिस्तान के गुरुद्वारों में फिलहाल सन्नाटा छाया हुआ है और कोई भी वहां नहीं रह रहा है।

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