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झारखंड में मिली सोने की बहुत बड़ी खान, देश को होगा लाखों करोड़ का फायदा

भारत को प्राचीन समय में सोने की चिड़िया कहा जाता था। इसके पीछे कारण भी बहुत खास था क्योंकि पुराने समय में यहां रहने वाले राजा महाराजाओं के पास बहुत अधिक मात्रा में सोना पाया जाता था और भारत की जमीन में भी काफी मात्रा में सोना मौजूद है। भारत के सोने के खजाने को विदेशी आक्रांता उन्हें काफी बार लूटा है इसके बावजूद भी आज तक भारत ने बहुत अधिक मात्रा में सोना उपलब्ध है। हाल ही में खबर आई है कि झारखंड में सोने की बहुत बड़ी खान मिली है। यही नहीं औरंगाबाद रोहतास और सासाराम में क्रोमियम और पोटेशियम की खान भी पाई गई है। आइए देखते हैं किस तरह खोजी गई है खान है और इससे भारत को कितना फायदा होगा।

इन जगहों पर मिले हैं पोटेशियम क्रोमियम के ब्लॉक

भारत के फिक्की सभागार में केंद्रीय कोयला और खनन मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बिहार के खान मंत्री जनक राम को खनिज सर्वे के संबंधित दस्तावेज सौंपे हैं। केंद्र ने कुल 14 राज्यों को विभिन्न खनिजों के 100 ब्लॉक देकर जल्द से जल्द इनकी नीलामी करने का आग्रह किया। बिहार के खान मंत्री जनक राम ने बताया कि बिहार में पोटेशियम और क्रोमियम के ब्लॉक दिए गए हैं इसके अलावा सासाराम रोहतास ने 10 वर्ग किलोमीटर का टिपर खनिज ब्लॉक और शाहपुर के 7 वर्ग किलोमीटर के ब्लॉक को शामिल किया गया है। क्रोमियम और पोटेशियम के भंडार मिलने के बाद यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि इससे निश्चित रूप से बिहार को काफी फायदा होगा। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट के आधार पर सबसे ज्यादा 21 ब्लॉक मध्य प्रदेश में 13 ब्लॉक राजस्थान में और 4 ब्लॉक बिहार के हिस्से में आए हैं।

इन जगहों पर मिले सोने के ब्लॉक

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में एक, झारखंड के सरायकेला खरसावां जिले में दो और कर्नाटक के हावेरी चित्रदुर्ग वेल्लारी देवनागरी वह हासन जिलों में 7 ब्लॉक तथा उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में 1 ब्लॉक दिया गया है।आंध्र प्रदेश के कडप्पा में हीरे, मध्य प्रदेश के छतरपुर, पन्ना में दो ब्लॉक मिले हैं।

तमिलनाडु के मदुरई में टंगस्टन के ब्लॉक मिले हैं

भारत को इन नए खनिज ब्लॉक की सहायता से लाखों करोड़ रुपए का फायदा होने वाला है। इंसानों से मिलने वाले खनिज के बाद भारत की दूसरे देशों पर निर्भर था काफी कम हो जाएगी। भारत के आत्मनिर्भर बनने की ओर यह एक बहुत बड़ा कदम साबित होने वाला है। आने वाले समय में पता लगेगा कि इंसानों से कितनी मात्रा में यह धातुएं मिलेंगे।

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