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दो दुल्हन एक दूल्हा दोनो लड़कियों से करी एक साथ शादी, दोनो लड़कियाँ है खुश

शादी को एक बहुत ही पवित्र रिश्ता माना जाता है. इस रिश्ते में बहुत ज्यादा प्यार होता हैं पति-पत्नी के बीच मे हैं. बोला जाता है की शादी पति-पत्नी के बीच का वो पवित्र रिश्ता हैं जिसके भगवान ऊपर से बना कर भेजता है. दुनिया मे जब किसी की शादी होती हैं तो लोग बोलते हैं कि यह जोड़ी भगवान ने अपने घर से ही बना कर भेजी हैं. हमारे शास्त्रों में लिखा है कि व्यक्ति का जन्म , परण , ओर स्वर्गवास सब कुछ पहले से ही तय होता हैं. भगवान अपने घर से की दो लोगो की जोड़ी बना कर भेजता हैं.

भगवान ने बनाई ऐसी जोड़ी जिसमे हैं एक लड़का और दो लड़किया

आज हम आपको जिस व्यक्ति के बारे में बताने जा रहे हैं भगवान से इसकी जोड़ी एक लड़की के साथ नही बल्कि दो-दो लड़कियों के साथ बना मर भेजी हैं. जी हाँ इस व्यक्ति ने एक नही बल्कि एक साथ दो लड़कियों से विवाह किया हैं वह भी एक ही मंडप में. अब आप सोच रहे होंगे कि यह कैसे संभग है कि एक व्यक्ति दो-दो लड़कियों से एक साथ कैसे शादी कर सकता हैं वह भी एक ही मंडप में क्योंकि दुनिया के कोई भी माता-पिता यह नही चायेगे की उनकी बेटी उंस लड़के से शादी करे जो कि किसी ओर से शादी करना चाहता हैं.

लेकिन ऐसा हुआ है बैताल जिले के केरिया गाँव में. बैताल जिले के संदीप नाम के व्यक्ति ने एक साथ , एक ही मंडप में दो लड़कियों से विवाह किया है वह भी उनके परिवार की मर्ज़ी से. आइए आपको बताते हैं कि आखिर मामला हैं क्या ओर ऐसी क्या वजह हैं जिसकी वजह से संदीप ने एक साथ दो कन्याओं से विवाह किया.

एक से करता था प्यार , दूसरी के लिए परिवार वालो ने ढाला दबाव

संदीप के बात कर तो यह पेशे से एक इंजीनियर हैं. संदीप अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए दूसरे शहर गया था. दूसरे शहर में संदीप पढ़ाई करने गया था लेकिन पढ़ाई के साथ वह प्यार भी कर बैठा. संदीप को अपनी ही कक्षा की लड़कीं से प्यार हो गया और प्यार ऐसा हुआ कि दोनो ने साथ शादी करने की कसम भी खा ली. इसी कसम से चलते जब संदीप अपनी प्रेमिका के साथ अपनिब गाँव गया और अपने पिता को बोला कि मैं अगर शादी करुगा तो सिर्फ और सिर्फ इसी लड़कीं से करूँगा नही तो किसी से भी नही करुगा.

लेकिन उसको क्या पता था कि उसके पिता ने उसकी शादी पहले से की गाँव की किसी लड़कीं से कर दिया है और उसके पिता को वचन भी दे दिया था कि मेरे बेटे की शादी तुम्हारी बेटी से ही होगी. लेकिन संदीप ने अपने पिता की एक भी नही सुनी और बोलने लगा कि मैं अपनी प्रेमिका से ही शादी करूँगा. बात यहाँ तक आ गई कि घर के मामले में गाँव की पंचायत को दख़ल-अंदाज़ी करनी पड़ी।

पंचायत ने किया ऐसा फ़ैसला , बन गया लोगो के लिए इतिहास

जब यह मामला गाँव की पंचायत तक गया तो पंचायत भी सोचने में पड़ गई कि क्या किया जाए क्योंकि पिता और बेटा दोनो ही अपनी जगह सही थे. बेटा तो अपनी प्रेमिका से शादी करना चाहता था लेकिन पिता चाहते थे कि उसकी शादी गाँव की उस लड़कीं से हो जिसके पिता को उसने वचन दिया हैं. अंत मे जाकर पंचायत ने यह फैसला किया कि अगर दोनो लड़कीं के परिवार वाले राजी है तो संदीप दोनो लड़कीं से एक साथ एक ही मंडप में शादी कर लेगा जिससे ना तो संदीप को अपना प्यार खोना पड़ेगा और ना ही उसके पिता का वचन टूटेगा. लेकिन अगर सरल शब्दो मे बोला जाए तो संदीप की मानो लॉटरी लग गई.

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