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नही सुना था कभी ग़रीबी का नाम भी, आज हो गई दोनो बहने दूसरों से रोटी लेने को मजबूर ये है वजह

हमारे बड़े-बुजुर्गों ने बहुत सही बोला है कि किस्मत ओर समय एक ऐसी चीज हैं जो कभी भी बदल सकती हैं. ऐसा इसलिए बोला जाता हैं क्योंकि अगर समय अच्छा चल रहा तो उसे बुरा होने में बिल्कुल भी समय नही लगता है. आज हम आपको उत्तरप्रदेश के लखनऊ जिले की रहने वाले दो बहनों के बारे में बातएगे जिनके साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है. क्योंकि इन दोनों बहनों के जीवन मे एक समय ऐसा था कि कभी घर मे मेहँगी-मेहँगी ओर लक्सरी गाड़िया थी.

जिस घर मे यह दोनो बहने अपने माता-पिता और अपने भाई के साथ रहती थी लेकिन किस्मत ने ओर समय ने कुछ इस तरह करवट बदली की आज यह दोनो बहने भीख मांगने को मजबूर हो गई हैं पिछले 40 सालों से यह दोनो बहने भीख मांगकर अपना पैठ भरती हैं. आइए आपको हमारे इस आर्टिकल के माध्यम से बतांते है कि ऐसा क्या हुआ जिसके चलते इन दोनो बहनों की आर्थिक स्थिति इतनी ख़राब हो गई.

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जिन दोनो बहनों की हम बात कर रहे हैं वह लखनऊ की रहने वाली हैं. इन दोनो बहनों का नाम राधा और मांडवी हैं. दोनो बहने की उम्र में सिर्फ 2 साल का ही अंतर हैं. बताया जा रहा हैं कि दोनो बहने पढ़ाई में बहुत ज्यादा होशियार थी जिसके चलते इनके पिता इन्हें बहुत बड़ी स्कूल में पढ़ाते थे. सुधा ओर मांडवी के पिता एक बहते बड़े हॉस्पिटल में डॉक्टर थे. इनका नाम आर. एम माथुर हैं. सुधा ओर मांडवी के पिता का एक दिन एक भयानक हादसे का शिकार हो गए थे जिसके चलते इनका स्वर्गवास हो गया.

पिता के स्वर्गवास के बाद पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत ज्यादा खराब हो गई. कुछ समय बाद दोनो की माँ का भी स्वास्थ्य खराब होने की वजह से स्वागवास हो गया. परिवार मानो बिल्कुल टूट सा गया हो और सब कुछ खत्म सा बो गया हो. परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी हो गई थी कि दोनो बहनों को अपना पैठ भरने के भीख माँगने का सहारा लेना पड़ा.

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सुधा ओर मांडवी इन दिनों सिग्नल पर जाके भीख माँग रही हैं और खाने के एक-एक दाने के लिए मोहताज हो रही हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दे कि वर्तमान समय दोनो बहनों की उम्र लगभग 60 ओर 65 साल हैं. बुढ़ापे की इस उम्र में भी दोने बहने एक समय के खाने के लिए मोहताज़ हो गई हैं. इन दोनों बहनों का जीवन बिल्कुल इस तरह बदला जैसे दिन से रात हो गई और फिर सुबह नही हो रही हो क्योंकि इतने अमीर परिवार से तालुख रखने वाली दोनो बहने आज भीख माँग कर खुद का पैठ भर रही हैं.

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